आगरा। जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक में लिए गए निर्णयों का नेशनल चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स और संपूर्ण उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल ने बृहस्पतिवार को स्वागत किया है। उद्यमियों और व्यापारियों ने कहा कि नए निर्णय से खरीदारों को राहत और इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के मामले में क्रेता को भी सुरक्षा मिली है।

जीवनी मंडी स्थित सभागार में आयोजित बैठक में चैंबर अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल और जीएसटी प्रकोष्ठ के चेयरमैन अमर मित्तल ने कहा कि बैठक में टैक्स स्लैब में सुधार के बाद अब प्रक्रियाओं को सरल बनाने और विवादों को घटाने पर जोर दिया गया है। संपूर्ण उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष पंकज अग्रवाल ने कहा कि इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के मामले में यदि खरीदार के पास वैध बिल और भुगतान का प्रमाण है तो विक्रेता द्वारा रिटर्न न भरने पर भी खरीदार का आईटीसी सीधे ब्लॉक नहीं किया जाएगा। इसके अलावा धारा 17(5) की समीक्षा के तहत मोटर वाहनों और व्यावसायिक खर्चों से जुड़े प्रतिबंधित आईटीसी नियमों को व्यावहारिक बनाने पर काउंसिल में सहमति बनी है। इन मांगों को लेकर संगठन ने पहले वित्त मंत्री को पत्र भेजा था।

नेशनल चैंबर के उपाध्यक्ष अंबा प्रसाद गर्ग ने कहा कि अब मामूली विसंगतियों पर शो-कॉज नोटिस के लिए एक न्यूनतम सीमा (थ्रेशोल्ड) तय की जाएगी। धारा 125 के तहत अधिकतम सामान्य जुर्माना 25,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये किया जाएगा। कोषाध्यक्ष विनय मित्तल ने कहा कि तेज रिफंड और आसान पंजीकरण की प्रक्रिया से राहत मिलेगी। इन्वर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर में रिफंड की प्रक्रिया स्वचालित (ऑटोमेट) होगी और बायोमीट्रिक आधार सत्यापन के माध्यम से मात्र 3 कार्य दिवसों में त्वरित पंजीकरण मिल सकेगा।

इस बैठक के दौरान उपाध्यक्ष नितेश अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष सीताराम अग्रवाल एवं मनीष अग्रवाल आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।



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