The festival of Sharad Purnima was celebrated with devotion and joy.

बटेश्वर मुख्य ब्रह्मलाल महादेव अर्ध नारीश्वर रूप मे विशेष श्रंगार सजावट मे अजे हुए

बटेश्वर/अछनेरा। शरद पूर्णिमा का पर्व रविवार को अनेक स्थानों पर श्रद्धा, उल्लास और पारंपरिक संस्कृति के साथ मनाया गया। तीर्थ बटेश्वर धाम स्थित मुख्य ब्रह्मलाल मंदिर में भगवान शिव का अलौकिक और भव्य शृंगार किया गया। इस दौरान शिवलिंग को अर्द्धनारीश्वर रूप में विशेष तौर पर सजाया गया, जिसके दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिर के मुख्य पुजारी जय प्रकाश गोस्वामी ने बताया कि भगवान शिव के इस अर्द्धनारीश्वर रूप के दर्शन करने से श्रद्धालुओं को भोले शंकर और माता पार्वती दोनों की कृपा का पुण्य लाभ प्राप्त होता है।


क्षेत्र में टेसू-झेंझी के विवाह की सदियों पुरानी लोक परंपरा धूमधाम से निभाई गई। बच्चों की टोलियों ने पारंपरिक लोकगीत गाते हुए चंदा और अनाज एकत्र किया। शरद पूर्णिमा की रात बांस की खपच्चियों से सुसज्जित दूल्हे टेसू की बरात गाजे-बाजे के साथ निकाली गई, जिसका वधू पक्ष की ओर से झेंझी के साथ स्वागत किया गया और विधि-विधान से प्रतीकात्मक फेरे कराए गए।

दूसरी ओर, रायभा के नगला लालदास गांव में सुबह मां भगवती की भव्य प्रभात फेरी निकाली गई। शाम को महिलाओं और ग्रामीणों ने परिक्रमा लगाई। मां भगवती के जागरण और भंडारे में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इस दौरान शांति स्वरूप, डॉ. रतन सिंह कुशवाह, मोहन सिंह कुशवाह, घनश्याम शर्मा, समंता सिंह और गजाधर सिंह कुशवाह आदि उपस्थित रहे।



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