अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) की कुलपति प्रो. नईमा खातून को प्रस्तावित वंदे मातरम् उत्कृष्टता पुरस्कार देने की घोषणा के पांच माह बाद पश्चिम बंगाल राजभवन सचिवालय के जवाब ने पूरे मामले को चर्चा में ला दिया है। सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई जानकारी में राजभवन ने कहा है कि इस विषय से संबंधित कोई भौतिक अभिलेख उपलब्ध नहीं है।
दरअसल, 14 फरवरी 2026 को एएमयू में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन डिकोलोनाइजिंग ए डिसिप्लिनः भारत की सभ्यतागत दृष्टि और वैश्विक अंतरराष्ट्रीय संबंध में तत्कालीन पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ. सीवी आनंद बोस मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने एएमयू की कुलपति प्रो. नईमा खातून को गवर्नर्स अवॉर्ड ऑफ एक्सीलेंस : वंदे मातरम् देने की घोषणा की थी। इसके लिए एक लाख रुपये की पुरस्कार राशि का भी ऐलान किया गया था। कार्यक्रम में राज्यपाल ने कुलपति को पुरस्कार संबंधी पत्र भी सौंपा था।
मामले में एएमयू के पूर्व मीडिया सलाहकार प्रो. जसीम मोहम्मद ने पश्चिम बंगाल राजभवन सचिवालय से आरटीआई के तहत कई बिंदुओं पर जानकारी मांगी। उन्होंने पूछा कि तत्कालीन राज्यपाल द्वारा जारी पत्र की वर्तमान स्थिति क्या है और उनके पद छोड़ने के बाद भी क्या पुरस्कार संबंधी घोषणा प्रभावी मानी जा रही है। लोक भवन, कोलकाता स्थित राज्यपाल सचिवालय के उप सचिव एवं राज्य जनसूचना अधिकारी की ओर से भेजे गए जवाब में कहा गया कि वर्तमान समय में इस विषय से संबंधित कोई भौतिक अभिलेख उपलब्ध नहीं है। आरटीआई जवाब के बाद पुरस्कार की प्रक्रिया और उसकी वर्तमान स्थिति को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
