यूपी के अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में दान राशि के कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं के मामले में ट्रस्ट ने जांच प्रक्रिया तेज कर दी है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी के निर्देशन में एक विशेष जांच कमेटी गठित की गई है, जो पूरे प्रकरण की तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर जांच करेगी। प्रारंभिक जांच में कुछ कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध मिलने के बाद उन्हें चिह्नित किया गया है। अब विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

जांच कमेटी में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के अलावा ट्रस्ट व संघ के पदाधिकारी शामिल किए गए हैं। जांच कमेटी का गठन बृहस्पतिवार को लखनऊ में हुई एक बैठक में लिया गया था। बैठक में ट्रस्ट व संघ के पदाधिकारी शामिल थे। सूत्रों के अनुसार, जांच कमेटी केवल नकदी के गायब होने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि दान संग्रह से लेकर जमा होने तक की पूरी प्रक्रिया का ऑडिट करेगी। 

कमेटी यह पता लगाएगी कि धनराशि किस स्तर पर और किस प्रक्रिया के दौरान प्रणाली से बाहर हुई। इसके लिए सीसीटीवी फुटेज, ड्यूटी रोस्टर, नकदी मिलान रजिस्टर, बैंक जमा रिकॉर्ड और डिजिटल ट्रांजैक्शन लॉग का परीक्षण किया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि जांच कमेटी यह भी देखेगी कि क्या यह मामला किसी एक व्यक्ति की हरकत थी या फिर इसमें संगठित स्तर पर मिलीभगत की आशंका है। कमेटी की रिपोर्ट ट्रस्ट प्रबंधन को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर विभागीय कार्रवाई, सेवा समाप्ति अथवा कानूनी कार्रवाई जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।

क्या-क्या जांच करेगी कमेटी


  • दान पेटियों से नकदी निकालने की पूरी प्रक्रिया का सत्यापन।

  • नकदी की गणना, पैकेजिंग और बैंक में जमा करने के बीच की प्रक्रिया का ऑडिट।

  • संबंधित कर्मचारियों की जिम्मेदारियों और उनके कार्यक्षेत्र की जांच।

  • सीसीटीवी फुटेज और प्रवेश-निकास रिकॉर्ड का मिलान।

  • नकदी मिलान (कैश रिकॉन्सिलिएशन) और बैंक जमा रिकॉर्ड की तुलना।

  • भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुधारात्मक सुझाव तैयार करना।

 

मंदिर से बाहर जाता रहा पैसा, सुरक्षाकर्मियों को भनक नहीं लगी

मामले का सबसे गंभीर पहलू यह माना जा रहा है कि कथित रूप से धनराशि लंबे समय तक मंदिर परिसर से बाहर जाती रही, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था को इसकी जानकारी नहीं मिल सकी। जांच कमेटी अब यह भी पड़ताल करेगी कि सुरक्षा जांच, निगरानी व्यवस्था और प्रवेश-निकास नियंत्रण प्रणाली में आखिर कहां चूक हुई। सीसीटीवी कवरेज, सुरक्षा कर्मियों की ड्यूटी और निगरानी तंत्र की प्रभावशीलता भी जांच के दायरे में रहेगी। यदि सुरक्षा स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है तो संबंधित कर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।



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