लखनऊ के गोमतीनगर रेलवे स्टेशन पर छपरा-गोमतीनगर एक्सप्रेस के स्लीपर कोच से महिला का क्षत-विक्षत शव मिलने के मामले में जांच के दौरान बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस जांच में सामने आया है कि जिस थावे जंक्शन से शव वाला स्टील बॉक्स ट्रेन में लोड किए जाने की आशंका है, वहां के सभी सीसीटीवी कैमरे पिछले 10 महीनों से बंद पड़े हैं। इस सनसनीखेज मामले की जांच के लिए गोपालगंज पहुंची लखनऊ रेल पुलिस को तकनीकी लापरवाही के कारण काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
थावे से छपरा तक कई स्टेशनों के CCTV बंद
जांच में पता चला है कि अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत लगाए गए कैमरे थावे जंक्शन पर काम नहीं कर रहे हैं। इतना ही नहीं, गोपालगंज, सिधवलिया, दिघवा-दुबौली और राजोपट्टी समेत कई अन्य स्टेशनों के कैमरे भी निष्क्रिय पाए गए हैं।
पांच रेलवे स्टेशनों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले
लखनऊ रेल पुलिस की तीन विशेष टीमों ने गोरखपुर से छपरा के बीच 15 और गोरखपुर से लखनऊ के बीच पांच रेलवे स्टेशनों के फुटेज खंगाले, लेकिन अहम सुराग हाथ नहीं लग सके। अब पुलिस वेंडरों, कुलियों और रेल कर्मचारियों से पूछताछ कर मैनुअल इंटेलिजेंस के जरिए जांच आगे बढ़ा रही है।
मृतका के मुस्लिम होने की आशंका
रेल पुलिस को शव के पास मिले कपड़ों और महिला के हाथ में रक्षा सूत्र या कलावा नहीं मिलने के आधार पर आशंका है कि मृतका मुस्लिम समुदाय से हो सकती है। अब जीआरपी छपरा-गोमतीनगर एक्सप्रेस (15114) के रिजर्वेशन चार्ट की जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि संबंधित कोच में उस दिन मुस्लिम समुदाय के कितने यात्री सफर कर रहे थे। उनके मोबाइल नंबरों की भी जांच की जा रही है।
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लापता महिलाओं के रिकॉर्ड खंगाल रही पुलिस
आरपीएफ के इंस्पेक्टर मनोज कुमार ने बताया कि गोपालगंज जिले के सभी थानों में दर्ज महिलाओं की गुमशुदगी की रिपोर्ट की जांच की गई है, लेकिन अब तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला है। रेल पुलिस ने गोपालगंज और सारण पुलिस से भी संपर्क किया है ताकि आसपास के जिलों में दर्ज लापता महिलाओं के मामलों का मिलान कर शव की पहचान की जा सके।
रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस स्टेशन को आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था से लैस किया गया था, वहां महीनों से बंद पड़े कैमरों ने जांच एजेंसियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
