वित्त एवं राजस्व विभागों से संबंधित नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) की वर्ष 2022-23 की रिपोर्ट में वित्तीय प्रबंधन और बजटीय नियंत्रण को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, एकीकृत वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (आईएफएमएस) में बिना बजटीय प्रावधान और स्वीकृति के 219.57 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए। वहीं, नई सेवाओं पर रोक के बावजूद 5,120.88 करोड़ रुपये का पुनर्विनियोजन किया गया। राज्य संसाधनों से वित्तपोषित योजनाओं में भी 10,186.62 करोड़ रुपये के अनियमित पुनर्विनियोजन के मामले सामने आए हैं।


2014-15 से आईटी संचालन समिति का पुनर्गठन नहीं : सीएजी की सूचना प्रौद्योगिकी लेखापरीक्षा में आईएफएमएस के आईटी गवर्नेस पर भी सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2014-15 में आईएफएमएस लागू होने के बाद से आईटी संचालन समिति का पुनर्गठन नहीं किया गया। इसके अलावा आईटी नीति भी तैयार नहीं की गई। परियोजना के निर्धारित पड़ाव समय से पूरा नहीं किए जाने के कारण केंद्र सरकार से मिलने वाली 20.06 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता भी जारी नहीं हो सकी। 

ये भी पढ़ें – टल सकता है इंसान का बुढ़ापा : उम्र की रफ्तार थामने की दहलीज पर विज्ञान, अगले 10 साल बेहद अहम



ये भी पढ़ें – यूपी: चुनाव के ठीक पहले बदली यूपी की राजनीति, ब्राह्मण वोट हुआ प्रासंगिक; अखिलेश के PDA में अब आया पंडित भी

स्थानांतरण सेवानिवृत्ति के बाद भी सक्रिय मिलीं यूजर आईडी

आईएफएमएस में डाटा सुरक्षा से जुड़ी गंभीर विसंगतियां भी मिलीं। जांच में ऐसे मामले सामने आए, जिनमें कर्मचारियों के स्थानांतरण या सेवानिवृत्ति के बाद भी उनकी उपयोगकर्ता आईडी सक्रिय थीं। इससे अनधिकृत रूप से वित्तीय प्रणाली तक पहुंच बनाए जाने का खतरा बना रहा।

संपत्तियों का पूरा ब्योरा छिपाने से 6.83 करोड़ के राजस्व की क्षति

स्टाम्प एवं निबंधन विभाग की जांच में भी राजस्व हानि का मामला सामने आया। संपत्तियों की खरीद-बिक्री से संबंधित दस्तावेजों में सड़क की चौड़ाई, संपत्ति के व्यावसायिक उपयोग व वास्तविक क्षेत्रफल जैसी जानकारियां पूरी तरह दर्ज नहीं की गईं। इससे संपत्तियों का सही मूल्यांकन नहीं हो सका व 6.83 करोड़ रुपये के स्टाम्प शुल्क एवं निबंधन फौस की कम वसूली हुई।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *