हाथरस जिले में इन दिनों बुजुर्ग अपने घरों में भी सुरक्षित नहीं हैं। साल की शुरुआत से ही हत्यारों के निशाने पर अकेले रह रहे बुजुर्ग हैं। पुलिस अभी तक पूर्व में हुई घटनाओं का खुलासा नहीं कर सकी थी कि अब हाथरस जंक्शन के गांव पहाड़पुर में वृद्ध की निर्मम हत्या हो गई। एक के बाद एक हो रहीं इन वारदातों ने पुलिस की बीट प्रणाली व सुरक्षा दावों की पोल खोलकर रख दी है।


हसायन के गांव अंडौली में हुई घटना के खुलासे के लिए पुलिस टीम लगी हैं। वृद्धा की मौत के मामले में विसरा सुरक्षित किया गया है। हत्या की पुष्टि नहीं नहीं हुई थी। पहाड़पुर की घटना में भी टीम लगी हैं। जल्द ही घटना का खुलासा किया जाएगा। बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए पुलिस कटिबद्ध है। हर थाना क्षेत्र में सत्यापन किए जाते हैं तथा बीट सिपाही नजर भी रखते हैं।-रामानंद कुशवाहा, एएसपी



केस-01


हसायन के गांव अंडौली में 9 जनवरी 2026 को महंत वेश में रह रहे वृद्ध अमरनाथ की गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। उनका शव घर में पड़ा मिला था। अमरनाथ के सिर पर पांच गंभीर वार किए गए थे, जिससे उनकी मौत हुई। पुलिस को इस घटना में कोई सुराग हाथ नहीं लगा है, जिससे हत्या करने वाले स्वतंत्र घूम रहे हैं।

केस-02

हसायन के गांव इंद्रनगर सिकतरा में 28 जनवरी की सुबह 65 वर्षीय मालती देवी घर में मृत अवस्था में मिली थीं। उनके पैर व गले पर चोट के निशान थे। मालती देवी उर्फ मुन्नी देवी नौ साल पहले पति केंद्रपाल सिंह की मौत के बाद से अकेले रह रही थीं। उनकी कोई संतान नहीं थी। परिवार से हिस्से में आई 25 बीघा जमीन के सहारे ही गुजर-बसर कर रही थीं। कान में पहने कुंडल न होने के कारण ग्रामीणों ने लूट के इरादे से हत्या की आशंका जाहिर की थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह स्पष्ट नहीं होने पर विसरा सुरक्षित किया गया था।

केस-03

हाथरस जंक्शन के गांव महौ में प्यारेलाल (75) की उनके ही दामाद ने हत्या कर दी। प्यारेलाल की चार बेटियां थीं। चारों की शादी होने के बाद उन्होंने छोटी बेटी लता देवी को साथ रख लिया था। लता का पति विजय अक्सर बुजुर्ग से मारपीट करता था। ग्रामीणों के अनुसार पहले दो बार समझौता करा दिया गया था। कोई सहारा न होने के कारण प्यारेलाल की मजबूरी थी उन्हें रखना। 22 अप्रैल की रात को विजय ने शराब के नशे में फिर उन्हें पीटा, जिससे उनकी मौत हो गई।

अकेले रह रहे बुजुर्ग आसान निशाना

इन सभी वारदातों में एक बात समान है, अकेलापन। अपराधी उन बुजुर्गों को निशाना बना रहे हैं, जो अकेले या किसी पर अधीन हैं, जिनकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस ने सवेरा योजना भी शुरू की थी, जिसमें अकेले रह रहे बुजुर्गों की सुरक्षा व स्वास्थ्य की देखभाल के दावे किए गए थे। बीट प्रणाली के जरिये बुजुर्गों के सत्यापन की बात कही गई थी, लेकिन अब धरातल पर कोई प्रक्रिया नजर नहीं आती।



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