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इटावा। चंबल फाउंडेशन के चंबल मिशन अभियान के तहत एक कार्यक्रम हुआ। इसमें स्वतंत्रता संग्राम के उपेक्षित नायकों को सामने लाने की मांग उठी। विशेषकर मल्लाह समाज के बलिदान को इतिहास में उचित स्थान देने पर जोर दिया गया।वक्ताओं ने बताया कि बंसरी गांव कभी क्रांतिकारियों की राजधानी था। यह 1857 की क्रांति में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लड़ा। भरेह रियासत के राजा रूप सिंह सेंगर ने 31 मई 1857 को अपनी रियासत स्वतंत्र घोषित की। उन्होंने 1857 से 1859 तक अंग्रेजों से कई युद्ध लड़े। इतिहासकार देवेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि बंसरी गांव क्रांतिकारी सेनाओं का प्रमुख पड़ाव था। यहां के हर व्यक्ति ने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाई। इस आंदोलन में मल्लाह समाज की भूमिका विशेष थी।
