
बिजली
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उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम की ओबरा और निजी क्षेत्र की ललितपुर की इकाई से विद्युत उत्पादन शुरू हो गया है, जबकि अनपरा में अभी इंतजार है। इस बीच टांडा की भी 110 मेगावाट की एक यूनिट में उत्पादन बंद हो गया है।
प्रदेश की विद्युत उत्पादन इकाइयों में अलग- अलग दिन तकनीकी खराबी आ गई थी। ऐसे में उत्पादन निगम की ओबरा और अनपरा की एक-एक इकाई और ललितपुर व ऊंचाहार की इकाई से उत्पादन ठप हो गया था। शनिवार को ओबरा और ललितपुर की इकाइयों से उत्पादन शुरू हो गया है। लेकिन अनपरा की 500 मेगावाट की इकाई ठप है, जबकि टांडा की 110 मेगावाट की भी एक यूनिट ठप हो गई है। फिलहाल प्रदेश में शुक्रवार देर रात तक 27024 मेगावाट की उपलब्धता रही। निगम की इकाइयों से 4726 मेगावाट बिजली उत्पादन हुआ। इसके अलावा 10303 मेगावाट आयातित 1185 मेगावाट एनर्जी एक्सचेंज से लिया गया।
दावा 24 घंटे का, आपूर्ति 21.23 घंटे
प्रदेश के शहरी एवं ग्रामीण इलाके में 24 घंटे बिजली आपूर्ति का दावा किया जा रहा है, जबकि विभागीय रिपोर्ट में 21.23 घंटे आपूर्ति की गई है। इसमें स्थानीय फाल्ट अतिरिक्त है। तमाम प्रयास के बाद भी हकीकत यह है कि ग्रामीण इलाके में 15 से 20 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। इसी तरह शहरी इलाके में भी रात के वक्त लगातार ट्रिपिंग हो रही है। विभागीय अधिकारी इसे लोकल फाल्ट का नाम दे रहे हैं।
ब्रेकडाउन और रोस्टिंग के नाम पर हो रही कटौती
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आरोप लगाया कि ब्रेकडाउन और रोस्टिंग के नाम पर अंधुधुंध कटौती हो रही है। इससे बिजली उपभोक्ता उमसभरी गर्मी में परेशान हैं। शुक्रवार को अधिकतम मांग 29147 मेगावाट तक गई है, जो 32 हजार तक पहुंच सकती है। ऐसे में कारपोरेशन प्रबंधन को हर स्तर पर इंतजाम करना चाहिए।
परिषद अध्यक्ष का कहना है कि प्रदेश में 3.45 लाख विद्युत उपभोक्ताओं को बिजली देने के लिए पुख्ता रणनीति बनानी चाहिए। दिन और रात दोनों वक्त ब्रेकडाउन लगातार हो रहा है। सिर्फ कागजों पर 24 घंटे आपूर्ति का दावा किया जा रहा है। हकीकत में उपभोक्ता परेशान हैं। परिषद की ओर से पहले ही बिजली की मांग 32 हजार मेगावाट तक पहुंचने का एलान किया गया था। इसके बाद भी पुख्ता रणनीति नहीं अपनाई गई। मई माह ही ब्रेक डाउन की संख्या बढ़ गई है, जून से सितंबर तक की स्थिति का अंदाजा अपने आप लगाया जा सकता है।
