इटावा। आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में सात सितंबर को रेखा देवी (55) की इलाज के दौरान मौत हो गई। मौत के चार दिन बाद भी उनके अंतिम संस्कार के लिए कोई परिजन आगे नहीं आया। पुलिस और रक्तदाता समूह ने परिजनों से संपर्क किया, लेकिन उन्होंने आने से मना कर दिया।
रेखा देवी को 21 अगस्त को औरैया के चिचोली मेडिकल कॉलेज से सैफई रेफर किया गया था। वह गंभीर रूप से बीमार थीं और बुखार से पीड़ित थीं। अस्पताल में उन्होंने अपना नाम, पता और बेटों के मोबाइल नंबर दर्ज कराए थे। सात सितंबर को दोपहर 12:16 बजे उनकी मौत हुई, उस समय कोई परिजन मौजूद नहीं था। गुरुवार को उनके पति और बेटों के मोबाइल नंबर भी बंद हो गए। पुलिस अब 72 घंटे की अवधि पूरी होने के बाद पोस्टमार्टम कराकर नियमानुसार अंतिम संस्कार की तैयारी में है।
रेखा देवी की ससुराल औरैया के दिबियापुर में है, जबकि मायका जालौन के कुठौंद में है। गांव के प्रधान और पति के अनुसार, वह करीब 10 वर्ष पहले बच्चों को छोड़कर किसी अन्य व्यक्ति के साथ चली गई थीं। इसके बाद परिवार से उनका कोई संपर्क नहीं रहा और उनके तीन बेटों में से बड़े बेटे की पत्नी ने भी उन्हें पहचानने से इन्कार किया। रक्तदाता समूह के संचालक शरद तिवारी ने परिजन को समझाने का प्रयास किया, लेकिन कोई अंतिम संस्कार के लिए तैयार नहीं हुआ। प्रभारी निरीक्षक भूपेंद्र सिंह राठी ने बताया कि परिजन के न आने पर नियमानुसार अंतिम संस्कार कराया जाएगा।
