सैफई। आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय परिसर में लावारिस हालत में छोड़ी गई नवजात बच्ची की इलाज के दौरान मौत हो गई। डॉक्टर ने बच्ची को बचाने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन जिंदगी की जंग में वह हार गई। महज एक-दो दिन की बच्ची को अस्पताल में भर्ती कराने के बाद उसके परिजन कहां चले गए, इसका पता नहीं चल सका। पहचान न होने पर नौ दिन बाद शनिवार को उसके शव को यमुना किनारे दफनाया गया।

रक्तदाता समूह के संचालक शरद तिवारी ने बताया सात अक्तूबर की शाम करीब 5:10 बजे नवजात बच्ची को आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में इलाज के लिए भर्ती कराया गया था। प्रथमदृष्टया आशंका जताई जा रही है कि बच्ची का जन्म विश्वविद्यालय परिसर में ही हुआ था और उसके परिजन जिंदा हालत में छोड़कर चले गए थे।

बच्ची की हालत गंभीर होने के चलते डॉक्टरों ने उसका उपचार शुरू किया, लेकिन आठ अक्तूबर को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। तीन दिन परिजन की तलाश की गई। इसके बाद थाना पुलिस ने 13 अक्तूबर की शाम करीब 5:40 बजे शव का पंचनामा भरकर उसे 72 घंटे के लिए शव गृह में सुरक्षित रखवा दिया।

इस दौरान बच्ची के परिजन की पहचान करने की कोशिश की गई, लेकिन कोई सामने नहीं आया। पहचान न होने पर शनिवार को शव का अंतिम संस्कार कराया गया और यमुना किनारे दफनाया गया। नवजात बच्ची को अंतिम विदाई देने पहुंचे रक्तदाता समूह के सदस्यों की आंखें नम हो गईं।

प्रभारी निरीक्षक भूपेंद्र राठी ने बताया कि 72 घंटे की समयावधि पूरी होने के बाद शव का पोस्टमार्टम कराया गया। इसके बाद नियमानुसार अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *