इटावा। चकरगनर में बीहड़ क्षेत्र होने के कारण यहां भूमि ऊबड़-खाबड़ है। सिंचाई एवं पानी की समस्या हमेशा बनी रहती है। इससे क्षेत्र के लोग पलायन करने को मजबूर हैं। यह समस्या जिला पंचायत अध्यक्ष अभिषेक अंशुल यादव ने पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष व सदस्यों के सामने रखीं। उन्होंने आयोग से चकरनगर क्षेत्र के लिए विशेष प्रावधान एवं सुविधाएं उपलब्ध कराने का अनुरोध किया, जिससे क्षेत्र के लोगों की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके।


बुधवार को कलक्ट्रेट सभागार में पिछड़ा वर्ग के आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति राम औतार सिंह एवं सदस्यों ने जनप्रतिनिधियों और पंचायत प्रतिनिधियों के साथ अन्य पिछड़े वर्ग की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थिति पर विस्तृत चर्चा की। जिला पंचायत अध्यक्ष ने कहा कि चकरनगर क्षेत्र में रोजगार व विकास के अवसर बढ़ने से लोग अपने क्षेत्र में रहकर विकास में योगदान दे सकेंगे। इसके साथ ही बसरेहर, बढ़पुरा, भरथना, महेंवा और ताखा के प्रतिनिधियों ने तर्क दिया कि ओबीसी वर्ग की स्थिति अभी सामान्य वर्ग के बराबर नहीं है। जनसंख्या के अनुपात में 27% से अधिक आरक्षण बढ़ाने की मांग उठाई गई। जसवंतनगर ब्लाक के पंचायत प्रतिनिधि पंकज ने बताया कि कश्यप एवं कहार सहित कुछ ओबीसी जातियों की आर्थिक स्थिति अभी भी कमजोर है। उन्होंने आवास एवं शिक्षा की स्थिति में भी अपेक्षित सुधार की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि आर्थिक कमजोरी के कारण इन वर्गों के लोगों को पिछड़ेपन का सामना करना पड़ता है तथा सामान्य वर्ग की तुलना में इनके पास कृषि संसाधन भी कम हैं।विकास खंड भरथना के ब्लॉक प्रमुख विनोद कुमार दोहरे ने बताया कि भरथना क्षेत्र में अनेक योजनाओं के माध्यम से विकास हुआ है और क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ी हैं। ओबीसी वर्ग की संख्या भी पर्याप्त है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में कुछ लोग कृषि तथा कुछ व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि ओबीसी वर्ग की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन अभी भी अन्य वर्गों की तुलना में अंतर मौजूद है। विकास खंड बढ़पुरा में ब्लॉक प्रमुख गणेश राजपूत से आयोग द्वारा क्षेत्र पंचायत सदस्यों की संख्या एवं उनमें ओबीसी सदस्यों की संख्या के संबंध में जानकारी ली गई। उन्होंने बताया कि कुल 72 क्षेत्र पंचायत सदस्यों में लगभग 30 सदस्य ओबीसी वर्ग से हैं। बढ़पुरा के ग्राम प्रधान पवन राजपूत ने बताया कि ओबीसी वर्ग की बेटियों में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट तक शिक्षा की जागरूकता बढ़ी है, लेकिन उच्च शिक्षा में अभी भी सुधार की आवश्यकता है। कश्यप, कहार, नाई और दर्जी जैसी जातियों की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। इनके पास सीमित कृषि भूमि और संसाधनों की कमी है। बढ़पुरा और बसरेहर में अधिकांश आबादी कृषि पर निर्भर है, जबकि चकरनगर में जमुनापारी बकरी पालन आजीविका का मुख्य साधन है। सैफई विकास खंड के ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि उदयभान यादव ने बताया रैपिड सर्वे के आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए वास्तविक ओबीसी आबादी को 70 प्रतिशित के आसपास बताया। आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यगण ने जनप्रतिनिधियों द्वारा रखे गए सुझावों एवं समस्याओं को गंभीरता से सुना तथा ओबीसी वर्ग की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर जानकारी प्राप्त की। चर्चा में यह प्रमुख रूप से सामने आया कि पिछड़े वर्ग की स्थिति में शिक्षा, रोजगार, कृषि, स्वरोजगार एवं राजनीतिक प्रतिनिधित्व के क्षेत्रों में सुधार हुआ है, लेकिन कुछ जातियों व भौगोलिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों में अभी भी आर्थिक एवं शैक्षिक चुनौतियां बनी हुई हैं। उन्होंने आने वाले दिनों में सुधार की बात कही। इस मौके पर पिछड़ा वर्ग के सदस्य ब्रजेश कुमार, संतोष कुमार विश्वकर्मा, डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया, एसपी सिंह समेत सीडीओ संजय कुमार सिंह, एडीएम बिपिन कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट राजेन्द्र बहादुर, डीडीओ राकेश प्रसाद आदि अफसर मौजूद रहे।



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