इटावा। यूपीआई पर दो हजार रुपये से अधिक के भुगतान पर प्रस्तावित कर लागू करने व्यवस्था का व्यापारी पुरजोर विरोध कर रहे हैं। कुछ व्यापारियों ने यह तक कह दिया है कि वह धीरे-धीरे इससे भुगतान लेना बंद कर रहे हैं। कुछ व्यापारियों ने कहा कि वह 15 अक्तूबर तक सरकार के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। अगर सरकार ने नियम वापस नहीं लिया तो मजबूरी में इससे बंद करना होगा।
फोटो 40: धर्मेंद्र जैन
लेनदेन की सीमा बढ़ाए
यूपीआई देश में डिजिटल भुगतान का एक महत्वपूर्ण एवं व्यापक माध्यम बन चुका है। विशेष रूप से लघु एवं मध्यम वर्गीय व्यापारियों, उद्यमियों तथा उपभोक्ताओं के लिए यूपीआई ने भुगतान प्रक्रिया को सरल, त्वरित एवं सुविधाजनक बनाया है। एमडीआर लागू होने की न्यूनतम लेनदेन सीमा दो हजार रुपये से बढ़ाकर 10 हजार रुपये की जाए। साथ ही मासिक अधिकतम एमडीआर सीमा एक लाख से बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दी जाए।-धर्मेंद्र जैन,जिला महामंत्री, अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल।
सेवा बंद करनी पड़ेगी
फोटो 41 : रजनेश राजपूत
यूपीआई से भुगतान लेना कम कर रहे हैं। 15 अक्तूबर तक अगर सरकार ने इस पर से कर नहीं हटाया तो इस सेवा को ही बंद करना पड़ेगा और कोई रास्ता नहीं है। सरकार ने पहले लोगों को यूपीआई की आदत डलवाई और अब उस पर कर लागू करने का प्रबंध कर रही है। डिजिटल लेन-देन को ऐसे बढ़ावा नहीं दिया जा सकता है।-रजनेश राजपूत, ट्रैक्टर व्यापारी।
15 अक्तूबर से ये नियम होंगे लागू
नए नियम से आम ग्राहकों और 2,000 रुपये तक के भुगतानों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। हालांकि 2,000 से 75,000 रुपये तक के भुगतान पर दुकानदारों को 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) देना होगा। 75,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर अधिकतम शुल्क 300 रुपये तय है। वहीं, यूटिलिटी बिल, ईंधन व रेलवे टिकट पर पांच रुपये का फिक्स चार्ज लगेगा। एक लाख रुपये तक की मासिक कमाई वाले छोटे व्यापारियों को इससे छूट मिलेंगी। वहीं, बड़े कारोबारियों पर नए नियम का आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
