सैफई। उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (यूपीयूएमएस) में सोमवार को रोबोट की सहायता से तीन जटिल सर्जरी की गईं। इनमें घुटने के दो और कूल्हे का एक प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक किया गया। यह संस्थान में पहली बार रोबोटिक जोड़ प्रत्यारोपण की उपलब्धि है।

ऑर्थोपेडिक्स विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. सुनील कुमार के नेतृत्व में ये सर्जरी हुईं। फरीदाबाद के अमृता अस्पताल के सर्जन साहिल गाबा ने इसमें विशेष सहयोग दिया। तीनों मरीजों की सर्जरी सफल रही और उनकी स्थिति संतोषजनक बताई गई है। रोबोटिक तकनीक से ऑपरेशन पूर्व मरीज की हड्डियों का विस्तृत आकलन होता है। कंप्यूटर पर त्रिआयामी तस्वीर बनाकर सर्जरी की योजना बनती है। इससे क्षतिग्रस्त हड्डी काटने और कृत्रिम जोड़ लगाने का सटीक निर्धारण होता है। रोबोटिक प्रणाली सर्जन को इसी पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार काम करने में सहायता देती है। यह पारंपरिक प्रक्रिया की तुलना में अधिक नियंत्रित और सटीक तरीका है। सर्जिकल टीम में हरीश कुमार, अंकित मित्तल और बेहोशी टीम में उषा शुक्ला, हिमांशु प्रिंस शामिल रहे।

विश्वविद्यालय के कुलपति अजय सिंह ने इसे संस्थान के लिए गर्व का विषय बताया। उन्होंने कहा कि भविष्य में और सर्जिकल रोबोट शामिल करने पर काम हो रहा है। इससे सर्जरी की क्षमता बढ़ेगी और मरीजों को बड़ा लाभ मिलेगा। यह सुविधा ग्रामीण मरीजों को जटिल उपचार के लिए महानगरों में जाने से रोकेगी।

विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. सुनील कुमार ने इसे विभाग की महत्वपूर्ण उपलब्धि कहा। इससे मरीजों को आधुनिक उपचार के साथ प्रशिक्षण के अवसर भी मिलेंगे। चिकित्सकों और छात्रों को उन्नत तकनीक सीखने का मौका मिलेगा। भविष्य में इस क्षेत्र में शोध की संभावनाएं भी विकसित होंगी। हरीश कुमार ने इसे यूपीयूएमएस के लिए ऐतिहासिक दिन बताया।



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