इटावा। महाराष्ट्र में पनीर में मिलावट पर सख्ती के बीच इटावा जिले में भी चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पिछले डेढ़ साल में लिए गए पनीर के करीब 85 फीसदी नमूने गुणवत्ता जांच में फेल पाए गए हैं। वर्ष 2025-26 और 2026-27 में कुल 27 नमूनों में से 23 अधोमानक घोषित किए गए। केवल चार नमूने ही मानकों पर खरे उतरे। जांच में अधिकांश नमूनों में निर्धारित मात्रा से कम वसा मिली है।
खाद्य सुरक्षा विभाग ने इन मामलों में सख्त कार्रवाई की है। अधोमानक पाए गए 23 मामलों में से छह मुकदमों का निस्तारण हो चुका है। संबंधित कारोबारियों पर कुल 1.90 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। शेष 17 मामले अभी न्यायालय में विचाराधीन हैं। जिले में पनीर की आपूर्ति स्थानीय स्तर के अलावा औरैया, मैनपुरी, फिरोजाबाद और मध्य प्रदेश के भिंड क्षेत्र से भी होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में पनीर की बढ़ती मांग और अधिक मुनाफे के लालच में मिलावट की जाती है। कई जगहों पर सिंथेटिक या कम गुणवत्ता वाले दूध का उपयोग किया जाता है। वसा रहित दूध पाउडर, स्टार्च और वनस्पति उत्पादों का भी इस्तेमाल होता है। इससे पनीर का वजन बढ़ता है, लेकिन उसका पोषण और गुणवत्ता घट जाती है।
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. अजय शर्मा ने इसके स्वास्थ्य प्रभावों पर बताया। मिलावटी या कम गुणवत्ता वाला पनीर खाने से पेट संबंधी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। अपच, खाद्य विषाक्तता और एलर्जी जैसी कई दिक्कतें भी सामने आती हैं। लंबे समय तक इसका सेवन करने पर स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं। बच्चों, बुजुर्गों और कम रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों के लिए मिलावटी पनीर ज्यादा खतरनाक है।
ऐसे तैयार होता है मिलावटी पनीर
पनीर से जुड़े व्यापारियाें के मुताबिक मिलावटी पनीर बनाने के लिए कम फैट वाले दूध में स्टार्च, सिंथेटिक पदार्थ या अन्य सस्ते मिश्रण मिलाकर उसे जमाया जाता है। कई बार दूध की जगह पुनर्गठित (रिकॉन्स्टीट्यूटेड) मिश्रण का उपयोग भी किया जाता है, जिससे पनीर देखने में सामान्य लगता है, लेकिन गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरता।
ऐसे करें मिलावटी पनीर की पहचान
– पनीर को हाथ से मसलने पर यदि वह अधिक टूटने लगे तो उसमें मिलावट या कम वसा हो सकती है।
– गर्म पानी में डालने पर अत्यधिक रबर जैसा खिंचाव गुणवत्ता पर सवाल खड़े करता है।
– स्वाद में अत्यधिक खट्टापन भी संकेत हो सकता है।
– भरोसेमंद दुकानों और पैक्ड उत्पादों को प्राथमिकता दें।
त्योहारों और सहालग में बढ़ जाती मांग
– होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग में पनीर की खपत सबसे अधिक होती है।
– शादी और त्योहारों के दौरान मांग कई गुना बढ़ जाती है।
– अधिक मांग के समय मिलावटी और घटिया गुणवत्ता का पनीर बाजार में आने की आशंका भी बढ़ जाती है।
– विशेषज्ञ ऐसे समय में केवल विश्वसनीय विक्रेताओं से खरीदारी की सलाह देते हैं।
खरीदते समय रखें इन बातों का ध्यान
– हमेशा ताजा और ठंडा पनीर ही खरीदें।
– खुले की बजाय पैक्ड और लेबलयुक्त पनीर को प्राथमिकता दें।
– बिल अवश्य लें, ताकि शिकायत की स्थिति में कार्रवाई हो सके।
– रंग, गंध और बनावट असामान्य लगे तो पनीर न खरीदें।
वर्जन
खाद्य विभाग की टीम की ओर से लगातार खाद्य पदार्थों के नमूने लिए जाते है। इसके जिले में अधिकांश नमूनों में वसा की कमी सामने आई है। 23 में से अभी तक सिर्फ छह मामलों में जुर्माने की कार्रवाई हुई है, बाकी के मामले न्यायिक प्रक्रिया में है। जल्द ही वृहद रूप से चेकिंग अभियान चलाया जाएगा।
-सतीश कुमार, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी
