संवाद न्यूज एजेंसी

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जाखलौन (ललितपुर)। बेतवा नदी के किनारे स्थित रणछोड़ धाम पर चल रहे मेले में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ रही है। बुधवार सुबह से ही वेदमंत्रों की गूंज से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। यहां आयोजित 108 कुंडीय श्री विष्णु एवं नव कुंडीय रुद्र महायज्ञ में तीसरे दिन वैदिक मंत्रोच्चार से विधि विधान के साथ पूजन अर्चन कर यजमानों ने यज्ञ में आहुतियां डालीं।

108 वेदियों पर विवाहित जोड़ों ने विष्णु महायज्ञ एवं रुद्र महायज्ञ में आचार्यों के मंत्रोच्चारण के बीच हवन में आहुतियां डालीं। तीन घंटे तक चले महायज्ञ से पूरा परिसर मंत्रोच्चार से गूंज गया। आहुतियां पूरी होने पर आरती का आयोजन किया गया। यजमानों ने 108 वेदियों की परिक्रमा कर आशीर्वाद लिया। यज्ञाचार्य कैलाश नारायण शास्त्री ने बताया कि भगवान विष्णु के द्वादश नाम से आहुतियां दी गई हैं। महायज्ञ के करने से कई जन्मों के पापों का नाश होता है। रणछोड़ धाम के महंत बलराम पुरी ने बताया कि यज्ञ में आहुति देने से पापों का नाश होने के साथ ही मनोवांछित फल मिलता है। यज्ञ को श्रेष्ठतम कर्म माना गया है। यज्ञ भगवान विष्णु का ही स्वरूप है। यज्ञ से वातावरण पवित्र होता है। यज्ञ से लौकिक व आध्यात्मिक संपदा मिलती है। उन्होंने कहा कि यज्ञ में आहुति देने से शारीरिक, मानसिक और भौतिक दोष खत्म होते हैं। व्यवस्थापक कृष्णानंद ने बताया कि श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न हो, इसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है।



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