झांसी। सरकारी योजनाओं का लाभ प्रत्येक परिवार को मिल सके इसके लिए ग्राम स्तर पर फैमिली रजिस्टर डिजिटलाइजेशन का कार्य ग्राम स्तर पर किया जा रहा है। इसमें जनपद की सत्यापन की प्रगति मात्र 11 प्रतिशत है। इस पर निदेशक पंचायती राज अमित कुमार सिंह ने डीपीआरओ डॉ. बालगोविंद श्रीवास्तव को चेतावनी देते हुए तीन दिन के अंदर स्पष्टीकरण मांगा है।

फैमिली रजिस्टर (या फैमिली आईडी) राज्य सरकारों द्वारा परिवारों का एक प्रमाणित डिजिटल डेटाबेस तैयार करने की व्यवस्था है। इसके माध्यम से नागरिकों को सभी सरकारी योजनाओं का लाभ, पेंशन और छात्रवृत्ति बिना किसी भागदौड़ के सीधे व पारदर्शी तरीके से प्राप्त होती है। इसके माध्यम से केंद्र और राज्य सरकार की 70 से अधिक योजनाओं जैसे कि वृद्धावस्था पेंशन, छात्रवृत्ति, सब्सिडी और आवास योजनाओं का लाभ बिना किसी रुकावट के सीधे पात्र परिवारों तक पहुंचता है। इसमें आय, जाति या मूल निवास जैसे प्रमाण पत्र बनवाने के लिए बार-बार अलग से दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं होती है। साथ ही सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार रुकता है और डिजिटल वेरिफिकेशन के जरिए योजनाओं का लाभ मिलने की प्रक्रिया तेज हो जाती है।

जनपद की बात करें तो करीब 2,61,168 परिवारों की फैमिली रजिस्टर डिजिटलाइज्ड का कार्य किया जाना था। अब तक कुल 1,42,980 की डेटा एंट्री हुई। यह एंट्री करीब 55 प्रतिशत है। सत्यापन की बात करें तो सिर्फ 15,558 का सत्यापन हुआ है। यह प्रगति मात्र 11 प्रतिशत है।

निदेशक पंचायती राज अमित कुमार सिंह ने इस संबंध में प्रदेश स्तरीय बैठक की तो पाया कि जनपद में सिर्फ 11 प्रतिशत ही सत्यापन का कार्य हुआ है। इस पर उन्होंने डीपीआरओ को चेतावनी देते हुए तीन दिन में स्पष्टीकरण तलब किया है।



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