इटावा/चकरनगर। खरीफ सीजन में खाद वितरण व्यवस्था एक बार फिर किसानों की परेशानी का कारण बन गई है। जिले की 60 साधन सहकारी समितियों में से 51 में ही खाद का वितरण हो रहा है। नौ समितियों को दूसरी समितियों से संबद्ध कर दिया गया है। इसका खामियाजा हजारों किसानों को भुगतना पड़ रहा है। गांव के पास खाद मिलने की सुविधा खत्म होने से किसानों को अब 15 से 30 किलोमीटर दूर स्थित समितियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
किसानों का कहना है कि जिन समितियों को बंद कर दूसरी समितियों से जोड़ा गया है, उन्हें कुछ समय पहले बड़े स्तर पर शुरू किया गया था। उस समय यहां आने वाले किसानों का विभाग की ओर से माला पहनाकर स्वागत किया गया था। दावा किया गया था कि किसानों को गांव या नजदीकी क्षेत्र में ही खाद उपलब्ध होगी, लेकिन अब व्यवस्था फिर पुराने ढर्रे पर लौट आई है। किसानों का कहना है कि यदि समितियों का नियमित संचालन नहीं होना था तो इन्हें शुरू क्यों किया गया। जिले के कई क्षेत्रों में इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है। नवंबर 2024 में चकरनगर क्षेत्र में 35 वर्ष बाद शुरू हुई सहसों, सिंड़ौस, गौहानी और कुंदौल साधन सहकारी समितियां भी अब नियमित रूप से संचालित नहीं हो रही हैं, इन्हें दूसरी समितियों से संबद्ध कर दिया गया है। सहसों को भरेह, सिंडौस को बंसरी, कुंदौल को चकरनगर और गौहानी को भरेह समिति से जोड़ा गया है। इससे आसपास के करीब 50 गांवों के किसानों को खाद लेने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है।
किसानों का आरोप है कि संबद्ध समितियों पर पहले स्थानीय खाताधारकों को खाद दी जाती है। बाहर से पहुंचे किसानों को कई बार सचिव के न मिलने, स्टॉक खत्म होने या अगले दिन आने की बात कहकर लौटा दिया जाता है। इससे उनका समय, किराया और मजदूरी तीनों बर्बाद हो रहे हैं।
सहसों निवासी किसान राजेश यादव ने बताया कि उनकी समिति को 30 किलोमीटर दूर भरेह से जोड़ दिया गया है। कई बार वहां पहुंचने पर सचिव नहीं मिलते और खाली हाथ लौटना पड़ता है। यदि नजदीकी समिति से संबद्ध किया जाता तो राहत मिलती।
गढ़ीमंगद निवासी किसान कौशलेंद्र राजावत ने कहा कि सिंडौस समिति शुरू होने पर लगा था कि अब गांव में ही खाद मिल जाएगी, लेकिन अब फिर पहले जैसी स्थिति हो गई है। पिछले साल गांव की समिति से आसानी से खाद मिल गई थी। अब 20 किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है।
सिंडौस, गढ़ीमंगद, बल्लो गढ़िया, खोड़न, सकतपुरा, मंसेकापुरा, चूरेपुरा, बगलन, बिंडवा खुर्द, जाजेपुरा, मर्दानपुरा, चौरेला ललूपुरा, तीलियन खोड़न, नौरंगा खोड़न, सहसों, बदनपुरा, कोटरा, टेड़ाडाड़ा, नदा, सदुपुरा, मिटहटी, हनुमंतपुरा, नीवरी, भदौरियनपुरा, अजीज की गढ़िया, कुंअरपुरा, प्रतापपुरा, पिपरौली गढ़िया, पसिया, चंद्रहंसपुरा, कुंदौल, राजपुर, पालीघार, बछेड़ी गन्यावर, महाराजपुरा, रम्मपुरा, तेजपुरा, रनिया, गौहानी, खीरीटी, काकरैया, गोपालपुरा, छिबरौली, कायंछी, नौगवां और खेड़ा।
वर्जन
पहले पीओएस मशीनों में लोकेशन की बाध्यता नहीं थी, इसलिए किसी भी केंद्र से खाद वितरण संभव था। अब मशीनें निर्धारित लोकेशन पर ही संचालित होती हैं। इस कारण कुछ समितियों को दूसरी समितियों से संबद्ध करना पड़ा। हालांकि, संबद्ध समितियों पर खाद का पर्याप्त स्टॉक है। किसी किसान को परेशानी आ रही है वह सीधे संपर्क कर सकता है। – कमलेश वर्मा, एआर कोऑपरेटिव
