{“_id”:”66c1001ea4a74484c1084cd4″,”slug”:”fields-turned-into-ponds-kharif-crops-ruined-orai-news-c-224-1-ka11004-118574-2024-08-18″,”type”:”story”,”status”:”publish”,”title_hn”:”Jalaun News: खेत हुए तालाबों में तब्दील, खरीफ की फसल बर्बाद”,”category”:{“title”:”City & states”,”title_hn”:”शहर और राज्य”,”slug”:”city-and-states”}}
मुहम्मदाबाद। तीन दिनों की बारिश से किसानों की खरीफ फसलें प्रभावित हो गईं हैं। डकोर क्षेत्र में किसानों की सैकड़ों एकड़ खेत तालाबों तब्दील नजर आ रहे हैं। कुछ किसानों ने खरीफ की फसल के लिए उधार लेकर खरीफ की फसल की बुआई की थी। जरूरत से ज्यादा बारिश होने से खरीफ की फसल बर्बाद हो गई है।
इस बार खरीफ की अच्छी फसल होने की संभावना पर किसानों ने खेतों की जुताई और खरीफ की फसलों की बोआई को लेकर उधार रुपया पैसा लेकर किसी भी तरह जून के अंतिम सप्ताह से लेकर जुलाई प्रथम सप्ताह तक मशक्कत करके खेतों में तिली, उर्द, मूंग समेत कई फसलों के बीज बोये थे। लेकिन विगत दिनों से शुरू हुई बारिश ने किसानों का सब कुछ बर्बाद कर दिया। डकोर क्षेत्र के जलभराव वाले इलाकों में बारिश का खास असर देखने को मिला। जहां खेत के खेत तालाबों में तब्दील हो गए।
जलभराव वाले प्रभावित क्षेत्रों में गांव कुठौंदा, मुहम्मदाबाद, अजनारी, चिल्ली, बढ़ेरा, डकोर, कुसमिलिया, मुहाना, जैसारी, मकरेछा, काहटा, कमठा, ऐरी, रमपुरा, ददरी, खरका, ऐर, टिमरों आदि शामिल हैं। किसानों का कहना है कि इस बार अच्छी बारिश के संकेत तो जरूर मिले थे, लेकिन हाल ही में हुई बारिश से मौसम में एकदम तब्दीली आई और झमाझम बारिश से किसान एक बार फिर प्रकृति का दंश झेलने को मजबूर हो गया है।
खेत जलमग्न होने खरीफ की फसल डूबी
मुहाना के किसान हीरालाल कहते हैं कि जैसे-तैसे सूखे के बाद किसान खरीफ की फसल तैयार करके अपने पुराने जख्मों पर मरहम लगाना चाह रहा था। लेकिन प्रकृति के आगे किसान बेबस रह गए हैं। हजारों की लागत से खरीफ की फसल की बुबाई की गयी थी, लेकिन खेतों में पानी इस कदर इकट्ठा हो गया है कि मानों यह खेत नहीं बड़े जलाशय हों।
किसानों की मेहनत पर फिर गया पानी
मुहम्मदाबाद के किसान पूरन वर्मा कहते हैं कि पिछली साल जो भी पैदावार हुई थी, उसका कुछ हिस्सा साल भर खाने के लिए रखा था और कुछ गेंहू बेचकर खरीफ की फसल की बोआई की तैयारी की थी। खेतों में तिल, उर्द, मूंग आदि की बोआई की थी, लेकिन मौसम के बदलते मिजाज ने सब किए धरे पर पानी फिर गया। तीन दिनों की तेज बारिश ने खेतों को तालाबों में बदल डाला।
खरीफ की फसल से रवी की फसल में मिल जाती राहत
कुसमिलिया किसान गोपीचंद कहते हैं कि इस बार खरीफ की फसल होने की पूरी उम्मीद थी, लेकिन मौसम का रुख बदलते देर न लगी और कुछ ही दिनों में इतनी तेज बारिश हो गयी कि बोई गई खरीफ की फसल पूरी तरह प्रभावित हो गई। किसानों को थोड़ी बहुत मदद इस खरीफ की फसल से मिल सकती थी, लेकिन अब यह भी बर्बाद हो गई। किसानों के सामने चिंता के बादल मंडऱाने लगे हैं।
सर्वे कराकर मिले मुआवजा
मुहम्मदाबाद किसान रियाज कहते हैं कि जैसे तैसे किसानों ने खरीफ की फसल तैयार की थी। लेकिन बीते दिनों बेतवा नदी खतरे के निशान के नजदीक पहुंच गई थी। जिससे समीपवर्ती 75 फीसदी खेती पानी के बहाव में बह गई और कहीं-कही फसलों में पानी भरने से वह भी अब नष्ट हो चुकी है। खराब हुई फसलों का सर्वे कराकर किसानों को मुआवजा दिया जाना चाहिए।
