दोस्ती…एक ऐसा अनमोल रिश्ता जो खून के रिश्तों से भी बढ़कर साथ निभाता है। यही वह सहारा है जो मुश्किल वक्त में हमें जीने की वजह देता है और सपनों को पूरा करने में सबसे बड़ी ताकत बनता है। फ्रेंडशिप डे के अवसर पर हम दोस्ती की ऐसी कहानियां लेकर आए हैं, जिन्होंने साबित किया है कि सच्ची मित्रता केवल साथ निभाने का नाम नहीं, बल्कि जीवन बदलने की शक्ति भी रखती है। ये कहानियां विश्वास, अपनेपन और अटूट साथ की मिसाल पेश करती हैं।
अपनों ने छोड़ा साथ तब दोस्ती बनी जीने की वजह
रामलाल वृद्धाश्रम में रहने वाले 79 वर्षीय दयाल मंगलानी और 80 वर्षीय रामानंद की दोस्ती मिसाल बन चुकी है। परिवारों से ठुकराए जाने के बाद मूलरूप से इंदौर निवासी दयाल मंगलानी और पुणे निवासी रामानंद वृद्धाश्रम पहुंचे थे। अपनों से बिछड़ने के दर्द ने दोनों को एक-दूसरे के करीब ला दिया। कुछ ही समय में वे एक-दूसरे का परिवार बन गए। अब सुबह की चाय, मॉर्निंग वॉक, अखबार पढ़ने, भोजन करने और शाम की बातचीत तक दोनों साथ-साथ रहते हैं। आश्रम के अन्य बुजुर्ग भी कहते हैं कि दोस्ती ने दोनों के दर्द को भुला दिया। करीब पांच साल से साथ रह रहे दोनों दोस्त एक-दूसरे की खुशियों के लिए जीते हैं।
सहेली की प्रेरणा से खड़ा किया कारोबार
सोनल बंसल और प्रियंका की दोस्ती भी प्रेरणादायक है। उनके पति आपस में मित्र थे। समय के साथ दोनों महिलाओं की दोस्ती इतनी गहरी हो गई कि उन्होंने एक-दूसरे को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी। सोनल मसालों का छोटा व्यवसाय करती थीं। उनसे प्रेरित होकर प्रियंका ने भी अपना बुटीक का कारोबार शुरू किया। सोनल ने हर कदम पर प्रियंका का उत्साह बढ़ाया। आज दोनों सफल बिजनेस वूमेन हैं। उनका कहना है कि सच्चा दोस्त वही है, जो आपके सपनों पर भरोसा करे और उन्हें पूरा करने का हौसला दे।