उत्तर प्रदेश की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल गंगा एक्सप्रेसवे अब अपने अंतिम चरण में है। 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरदोई से इसका लोकार्पण करेंगे, इसके साथ ही बदायूं जिला भी विकास की मुख्यधारा से मजबूती से जुड़ जाएगा। यह एक्सप्रेसवे बदायूं के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव लाएगा, जो अब तक अपेक्षाकृत पिछड़ा माना जाता था। यह केवल एक सड़क नहीं, बल्कि जिले की अर्थव्यवस्था, रोजगार, कृषि और औद्योगिक वृद्धि की रीढ़ बनेगा।
गंगा एक्सप्रेसवे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बदायूं जनपद से होकर गुजर रहा है, इससे यह जिला सीधे उच्च गति संपर्क से जुड़ जाएगा। जिले में इसकी कुल लंबाई लगभग 91 किलोमीटर है, जो 195 गांवों से होकर गुजरेगा। पापड़, वनकोटा और घटपुरी बरेली मार्ग पर तीन इंटरचेंज बनाए गए हैं, जो मेरठ से प्रयागराज तक सीधा मार्ग प्रदान करेंगे। यह बुनियादी ढांचा नेटवर्क जिले के कई ग्रामीण क्षेत्रों को पहली बार बड़े पैमाने पर जोड़ेगा। परियोजना के लिए बदायूं में करीब 3.42 लाख हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया गया है। इन गांवों के किसानों ने अपनी कृषि भूमि इस परियोजना के लिए दी, जिससे एक्सप्रेसवे का निर्माण संभव हो पाया। प्रधानमंत्री मोदी ने 18 दिसंबर 2021 को शाहजहांपुर से इसका शिलान्यास किया था। निर्माण में लगभग पांच वर्ष का समय लगा है, और अब यह लोकार्पण के लिए तैयार है।
निर्माण कार्य में सामने आईं कई चुनौतियां
इतनी बड़ी परियोजना को जमीन पर उतारना आसान नहीं था और बदायूं में भी कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा। भूमि अधिग्रहण सबसे बड़ी चुनौती थी, जहां किसानों के विरोध और मुआवजे को लेकर असहमति ने प्रक्रिया को जटिल बना दिया। कानूनी प्रक्रियाओं में देरी भी एक बाधा थी। पर्यावरणीय और भौगोलिक बाधाओं में जलभराव वाले क्षेत्रों से निपटना और नदियों व नालों के ऊपर पुलों का निर्माण शामिल था। कोविड-19 महामारी ने निर्माण के शुरुआती वर्षों में काम को प्रभावित किया, जिससे मजदूरों की कमी और निर्माण सामग्री की आपूर्ति में व्यवधान आया।
बारिश के मौसम में काम धीमा होना और भारी मशीनरी के संचालन में कठिनाई जैसी तकनीकी और मौसम संबंधी समस्याएं भी थीं। इन सभी चुनौतियों के बावजूद, परियोजना को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा किया गया है। पर्यावरण का भी विशेष ध्यान रखा गया है, जिसके तहत लाखों पौधों का रोपण किया जा रहा है। जल संचयन प्रणाली और हरित पट्टी का विकास भी इस परियोजना का हिस्सा है।
