आलू बेल्ट में तीखी धूप के बाद भी खेतों में हर तरफ हरियाली दिखती है। यह हरियाली मक्के की फसल की है,जो आलू से तबाह हुए किसानों के चेहरे पर संतोष का भाव ला रही है। उन्हें भरोसा है कि मक्के की फसल से न सिर्फ आलू का घाटा पूरा होगा बल्कि वे मालामाल होंगे। क्योंकि इस खेती में लागत नाम मात्र की लगी है।

आलू बेल्ट के खेतों में पूर्वांचल और बुंदेलखंड की तरह धूल उड़ती नहीं दिखती है, बल्कि हर तरफ मक्के की फसल की हरियाली है। मक्के के एक- एक पौधे में दो से तीन बालियां दिखती हैं। किसान इस खेती के दम पर भविष्य की योजनाएं बना रहे हैं। फर्रुखाबाद, कन्नौज, इटावा, औरैया, कानपुर देहात सहित आसपास के जिलों में जहां आलू ने किसानों के सपने चकनाचूर कर दिए हैं, वहां अब मक्के ने हिम्मत दी है। 

 



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