इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि केवल स्निफर डॉग (खोजी कुत्ते) के संकेतों के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। डॉग ट्रैकिंग को साक्ष्य के रूप में पेश किया जाता है तो ट्रैकिंग पंचनामा और डॉग हैंडलर की गवाही जरूरी है।

इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने हत्या मामले में आजीवन कारावास की सजा रद्द करते हुए आरोपियों को बरी कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर व न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने दिया है। मामला आगरा के थाना कागरौल क्षेत्र का है। 14 अक्तूबर 1998 की रात सुखपाल उर्फ मुन्ना घर से निकला था। अगले दिन उसका शव गांव के पास एक खेत में मिला। पुलिस स्निफर डॉग के साथ मौके पर पहुंची। उसके संकेतों के आधार पर पुलिस ने अपनी रिपोर्ट तैयार की। इसके बाद पुनर्विवेचना के बाद सीबीसीआईडी ने भंवर सिंह, बेनीराम, ओमप्रकाश और कप्तान सिंह के खिलाफ हत्या का आरोपपत्र दाखिल किया।

ट्रायल कोर्ट ने वर्ष 2020 में इन चारों को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। आरोपियों ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद पाया कि अभियोजन का पूरा मामला विरोधाभासों से भरा हुआ है। एक ओर एफआईआर में तीन अलग लोगों को आरोपी बनाया गया। वहीं, सीबीसीआईडी की जांच में चार अन्य लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया।



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