इलाहाबाद हाईकोर्ट ने झांसी के चर्चित पुष्पराज उर्फ पुष्पेंद्र हत्याकांड में ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए सभी छह अभियुक्तों की आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी है। कोर्ट ने दोषियों की अपील को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि ट्रायल कोर्ट की ओर से दी गई सजा में हस्तक्षेप का कोई ठोस आधार नहीं है।

यह आदेश न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय व न्यायमूर्ति डॉ. अजय कुमार द्वितीय की खंडपीठ ने दिया है। झांसी के नवाबाद थाना क्षेत्र अंतर्गत मुस्तरा गांव में जुलाई 2007 की रात वारदात हुई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार मृतक पुष्पराज अपने परिवार के साथ घर में टीवी देख रहा था तभी गांव के ही कृष्णपाल उर्फ लाला, ऋषि पाल, रघुनाथ, रंजीत, बहादुर और उधम सिंह ने हथियारों से लैस होकर उसके घर पर हमला बोल दिया। हमले में गंभीर रूप से घायल पुष्पराज ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था।

ट्रायल कोर्ट ने वर्ष 2011 में कृष्णपाल, ऋषि पाल, रघुनाथ, रंजीत, बहादुर और उधम सिंह को हत्या और बलवा करने का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। दोषियों ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

सुनवाई के दौरान अदालत के सामने पेश की गई पोस्टमार्टम रिपोर्ट से हमलावरों की क्रूरता का खुलासा हुआ। पुष्पराज के शरीर पर चोट के 10 गंभीर निशान थे। शरीर के कई हिस्सों की हड्डियां चकनाचूर हो गई थीं। कोर्ट ने माना कि यह हमला पूरी योजना के साथ जान लेने की नीयत से किया गया था।

कोर्ट ने सुनवाई के बाद कहा कि गवाहों के बयान और मेडिकल साक्ष्य दोषियों के खिलाफ पुख्ता हैं। हाईकोर्ट ने संबंधित अदालत को आदेश दिया है कि जमानत पर मौजूद दोषियों को तत्काल हिरासत में लेकर जेल भेजा जाए।



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