इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि आरोप पत्र दाखिल होने के बाद भी सात साल से कम सजा वाले मुकदमे के लंबित होने के आधार पर चरित्र प्रमाणपत्र जारी करने से इन्कार नहीं किया जा सकता। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा, न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने झांसी के डीएम का आदेश रद्द कर दिया। साथ ही याची राम सरन साहू का चरित्र प्रमाणपत्र दो हफ्ते में जारी करने का आदेश दिया है।
याची ने चरित्र प्रमाणपत्र जारी कराने का आवेदन डीएम कार्यालय में दाखिल किया था। डीएम ने आवेदन को इस आधार पर खारिज कर दिया कि याची के खिलाफ एक आपराधिक मुकदमा ट्रायल कोर्ट में लंबित है। उसमें आरोप पत्र भी दाखिल हो चुका है। इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
याची के अधिवक्ता ने प्रदेश सरकार के नौ अप्रैल 2026 को शासनादेश व हाईकोर्ट के आदेशों का हवाला दिया। दलील दी कि याची के खिलाफ लंबित आपराधिक मुकदमे में भले ही आरोप पत्र दाखिल हो चुका है, लेकिन संबंधित अपराधों में अधिकतम सजा सात साल से कम है। चरित्र प्रमाणपत्र जारी नहीं करना अवैधानिक है।