ललितपुर। हिंदी को केवल पढ़ाई का विषय न मानकर दैनिक जीवन और व्यवहार का हिस्सा बनाना होगा। यह भाषा के प्रति उनके जुड़ाव को मजबूत करेगा। युवाओं को हिंदी साहित्य,कहानियों और कविताओं से जोड़ा जाना चाहिए। यह बात संत स्वामी ब्रह्मानंद महाविद्यालय जखौरा के प्रोफेसर डीपी वर्मा ने कही।
उन्होंने कहा कि यदि युवा हिंदी में पढ़ने का प्रयास करें। हिंदी में लिखने और अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने का अभ्यास करें, तो हिंदी के प्रति उनका लगाव और अधिक मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं है। यह हमारी मातृभाषा होने के साथ-साथ हमारी संस्कृति का भी अभिन्न अंग है। यह हमारी परंपराओं और राष्ट्रीय पहचान से गहराई से जुड़ी हुई है। इसलिए, हिंदी का संरक्षण और संवर्धन हम सभी का कर्तव्य है।
वहीं कवि पंकज अंगार ने हिंदी भाषा की महिमा और उसकी साहित्यिक विरासत को पंक्तियों में रेखांकित किया ‘प्रेम दीप से हुआ है जगमग दिव्य शिवाला हिंदी का,सबके सर पर चढ़ कर बोला नशा निराला हिंदी का,पंत, प्रसाद, निराला, मीरा, सूर, कबीरा, तुलसी के दिव्य दीप में सदा रहेगा अमर उजाला हिंदी का। उन्होंने कहा कि कवियों ने हिंदी भाषा को समृद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनकी रचनाएं आज भी पाठकों को प्रेरित करती हैं। युवाओं को हिंदी साहित्य की समृद्ध विरासत से परिचित कराने का आह्वान करते हुए कहा हिंदी हमारी राष्ट्रीय पहचान का आधार है, जिसे मजबूत करना आवश्यक है।
