कालपी। राजस्व विभाग की ऑनलाइन खसरा व्यवस्था में इस बार भी गड़बड़ी सामने आई है। ई-क्रॉप सर्वे करने वाले निजी सर्वेयरों ने कई किसानों के खेतों में खड़ी फसलों को ऑनलाइन खसरे में दर्ज ही नहीं किया। कहीं सिंचित खेतों को खाली दिखा दिया गया तो कहीं खरीफ की फसल बोए जाने के बावजूद रिकॉर्ड में जमीन बंजर दर्ज है। इससे किसानों के सामने अपनी उपज सरकारी क्रय केंद्रों पर बेचने का संकट खड़ा हो गया है।
शासन ने राजस्व विभाग के कामकाज को ऑनलाइन करने के क्रम में खतौनी, नक्शा और खसरा समेत कई व्यवस्थाओं को डिजिटल कर दिया है। अब लेखपालों के माध्यम से खसरा तैयार कराने के बजाय ई-क्रॉप सर्वे के जरिए खेतों में बोई गई फसलों का विवरण दर्ज कराया जा रहा है। रबी, खरीफ और जायद की फसलों के सर्वे के लिए पंचायत सहायकों, रोजगार सेवकों के साथ निजी सर्वेयरों को भी लगाया गया है। सर्वेयरों को प्रति गाटा पांच रुपये भुगतान किए जाने की व्यवस्था है। इसके बावजूद कई वर्षों से चल रही इस व्यवस्था में खामियां दूर नहीं हो पा रही हैं।
कालपी क्षेत्र के मगरौल गांव निवासी संदीप कुमार, विवेक और गंगा प्रसाद, गढ़ी तगा की किसान सारिका, नरहान के मनोज पांडेय तथा लंगरपुर के श्याम बिहारी समेत कई किसानों ने सर्वे पर सवाल उठाए हैं। किसानों के मुताबि उनके खेतों में खरीफ की फसलें बोई थीं। कई खेतों में ज्वार और बाजरा खड़ा था, लेकिन ऑनलाइन खसरे में जमीन खाली दर्ज कर दी गई। ऑनलाइन खसरे में फसल दर्ज नहीं होने का असर सरकारी खरीद पर पड़ने की आशंका है। किसानों को चिंता है कि रिकॉर्ड में फसल का विवरण न होने पर क्रय केंद्रों पर उपज बेचने में दिक्कत आएगी। ऐसे में उन्हें खुले बाजार में कम कीमत पर उपज बेचने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। किसानों का कहना है कि सर्वे में लापरवाही का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है।
फोटो- 03 सत्येंद्र।
खेत में खड़ी थी फसल, खसरे में दिखा दिया खाली
हमारे खेत में खरीफ की फसल बोई गई थी, लेकिन ऑनलाइन खसरे में खेत खाली दिखाया जा रहा है। जब खेत में फसल मौजूद है तो सर्वे में उसका विवरण क्यों दर्ज नहीं किया गया। रिकॉर्ड की गलती के कारण सरकारी क्रय केंद्र पर उपज बेचने में परेशानी हुई तो नुकसान हमें ही उठाना पड़ेगा।
– सत्येंद्र सिंह, भगाैरा
———————–
गलत सर्वे से कम दाम पर उपज बेचने की नौबत
फोटो – 04 रामवीर, बैरई।
खेतों में ज्वार और बाजरा खड़ा होने के बावजूद खसरे में जमीन खाली दर्ज कर दी गई। किसानों ने फसल उगाने में बीज, खाद, पानी और मेहनत लगाई है। अगर ऑनलाइन रिकॉर्ड सही नहीं हुआ तो सरकारी खरीद का लाभ मिलना मुश्किल हो सकता है और मंडी में कम दाम पर उपज बेचनी पड़ेगी।
– रामवीर, बैरई
———————-
ठीक कराएंगे प्रविष्टि
क्रॉप सर्वे का कुछ काम अभी शेष है। जिसे लेखपाल पूरा कर रहे हैं। किसी किसान की फसल गलती से सर्वे में दर्ज होने से छूट गई है और इसकी शिकायत मिलती है तो जांच कर लेखपाल के माध्यम से प्रविष्टि दुरुस्त कराई जा सकती है।
– शिरीष मिश्रा, तहसीलदार
