जालौन। मकान के लेनदेन में रुपये न मिलने से परेशान होकर फंदा लगाने वाले प्रदीप कुमार के मामले में पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। पत्नी शीला देवी की तहरीर पर राजबहादुर यादव, उनके भाई और दस्तावेज लेखक माताप्रसाद के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। वहीं, आत्महत्या से पहले प्रदीप द्वारा बनाया गया वीडियो भी सामने आया है, जिसमें उसने तीनों पर रुपये न देने और धोखाधड़ी करने के आरोप लगाए हैं।
कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला सहावनाका निवासी प्रदीप कुमार के सात माह के बेटे धीरज का ग्वालियर में इलाज चल रहा था। पत्नी के अनुसार बेटे के उपचार के लिए प्रदीप ने घुआताल निवासी राजबहादुर यादव से दो लाख रुपये उधार लिए थे। इसके एवज में मकान का मुहायदा किया गया था। आरोप है कि करीब डेढ़ लाख रुपये लौटाने के बाद भी मकान वापस नहीं किया गया।
आरोप है कि बाद में राजबहादुर ने छह लाख रुपये में मकान लेने की बात कही और मकान अपने भाई के नाम करा लिया। रुपये चेक से देने की बात कही गई, लेकिन बाद में चेक वापस लेकर दो दिन में नकद भुगतान का आश्वासन दिया गया। आरोप है कि 14 अगस्त को प्रदीप रुपये मांगने पहुंचा तो उसके साथ गाली-गलौज और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग कर उसे भगा दिया गया। इसके बाद वह मानसिक रूप से परेशान था और शनिवार रात उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
कोतवाल हरिशंकर चंद ने बताया कि पत्नी की तहरीर पर तीनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। मामले की जांच की जा रही है। वीडियो समेत सभी साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
वीडियो पोस्ट होता तो शायद समय रहते पहुंचती मदद
प्रदीप ने मौत से पहले मोबाइल में वीडियो रिकॉर्ड किया था। इसमें उसने राजबहादुर यादव, उनके भाई और दस्तावेज लेखक माताप्रसाद पर रुपये न देने और धोखाधड़ी के आरोप लगाए। खास बात यह है कि वीडियो रिकॉर्ड करने के बाद वह उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं कर सका। उसकी मौत के बाद परिजनों को मोबाइल में वीडियो मिला।
ऐसे मामलों में आत्महत्या से पहले बनाया गया वीडियो यदि समय रहते सोशल मीडिया पर पोस्ट हो जाए तो परिजन, मित्र या अन्य लोग संकट की जानकारी पाकर तत्काल मदद के लिए पहुंच सकते हैं। हालांकि, इस मामले में वीडियो पोस्ट होने से पहले ही प्रदीप की मौत हो गई। इसलिए यह कहना संभव नहीं है कि वीडियो सोशल मीडिया पर आता तो घटना टल जाती, लेकिन समय पर सूचना मिलने पर मदद की संभावना जरूर बन सकती थी।
