उरई। चार महीने देरी से हुए होर्डिंग ठेके में इस बार नगर पालिका को 11 लाख का नुकसान उठाना पड़ा है। नायब तहसीलदार हरदीप व अधिशासी अधिकारी राम अचल कुरील की उपस्थिति में होर्डिंग का ठेका 8.15 लाख रुपये में फाइनल हो गया। पिछले वर्ष यह ठेका 19 लाख रुपये में हुआ था। वहीं, नियम विरुद्ध प्रक्रिया बनाने पर सभासद और नायब तहसीलदार के बीच नोकझोंक हुई।
गौरतलब है कि नगर पालिका मार्च माह में शहर में होर्डिंग का ठेका कराती है। पिछले वर्ष नगर पालिका को इससे 19 लाख रुपये सालाना की आय हुई थी। इस बार यह ठेका चार महीने लटका रहा। इसको लेकर सभासद लगातार नगर पालिका अधिकारियों पर आरोप लगाते रहे। नगर पालिका अधिकारियों का कहना था कि टेंडर कराया गया था, पर किसी कारण से हो नहीं हो सका था।
सोमवार को नगर पालिका में ठेके की नीलामी प्रक्रिया शुरू कराई गई तो सभासद बिपिन सेठ ने ठेकेदार की अनुपस्थिति में उनके बेटे द्वारा लगाई जा रही बोली का विरोध किया। इस पर नायब तहसीलदार हरदीप ने सभासद पर कानूनी कार्य में बाधा डालने का आरोप लगा दिया। दोनों के बीच कुछ देर बातचीत होने के बाद सभासद वहां से चले गए। बाद में अधिशासी अधिकारी रामअचल कुरील ने नीलामी शुरू कराई तो 8.15 लाख रुपये सर्वाधित बोली गई और ठेका फाइनल हो गया।
सभासद का आरोप-लापरवाही से हुआ बड़ा घाटा
सभासद बिपिन सेठ ने आरोप लगाया कि नगर पालिका अधिकारियों की लापरवाही की वजह से ठेका होने में चार महीने की देर हुई। आरोप लगाया कि इन चार महीनों में होर्डिंग नहीं हटवाए गए और वसूली जारी रही। अब ठेका हुआ तो पिछले साल की तुलना में 11 लाख रुपए का घाटा नगर पालिका को हुआ है।
ईओ बोले-समय कम बचा
नगर पालिका के ईओ रामअचल कुरील ने बताया कि टेंडर पहले भी कराने का प्रयास किया गया था, पर किसी कारणवश हो नहीं सका था। चूंकि चार महीने निकल चुके हैं और कागज फाइनल होने में एक महीने का समय और लग जाएगा, इसलिए ठेकेदार को कम समय मिलेगा। इसी हिसाब से बोली लगाई गई है।
