Jansath / जानसठ में शनिवार को महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित हुआ। उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप ने कस्बे के मोहल्ला बुधबाजार स्थित महर्षि कश्यप धर्मशाला परिसर में महर्षि कश्यप की भव्य प्रतिमा और स्मारक निर्माण के लिए विधिवत भूमि पूजन किया। प्रदेश सरकार की ओर से प्रस्तावित इस परियोजना पर 1 करोड़ 41 लाख 13 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे।

भूमि पूजन कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में समाज के लोग, जनप्रतिनिधि, राजनीतिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। कार्यक्रम में महर्षि कश्यप के धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे। राज्यमंत्री नरेंद्र कश्यप ने कहा कि महर्षि कश्यप को वेद, पुराण और उपनिषद जैसे धार्मिक ग्रंथों में श्रेष्ठ ऋषि के रूप में स्वीकार किया गया है और उनके जीवन दर्शन से समाज को प्रेरणा लेनी चाहिए।

महर्षि कश्यप की भव्य प्रतिमा से जुड़ेगी आस्था और विरासत

जानसठ में बनने वाला प्रस्तावित स्मारक महर्षि कश्यप की स्मृति और उनके धार्मिक-सांस्कृतिक योगदान को समर्पित होगा। परियोजना के तहत उनकी भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी और स्मारक परिसर विकसित किया जाएगा।

भूमि पूजन के साथ ही इस परियोजना के निर्माण की औपचारिक शुरुआत हो गई है। सरकारी स्तर पर स्वीकृत धनराशि के माध्यम से स्मारक को विकसित किया जाना प्रस्तावित है।

स्थानीय स्तर पर इस घोषणा को कश्यप समाज के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने स्मारक निर्माण को लेकर प्रसन्नता व्यक्त की।

राज्यमंत्री नरेंद्र कश्यप बोले- महर्षि कश्यप सृष्टि के रचनाकार थे

भूमि पूजन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यमंत्री नरेंद्र कश्यप ने महर्षि कश्यप के धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि महर्षि कश्यप सृष्टि के रचनाकार थे और भारतीय धार्मिक परंपरा में उनका स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, वेद, पुराण और उपनिषद जैसे धार्मिक ग्रंथों में महर्षि कश्यप को श्रेष्ठ ऋषि के रूप में स्वीकार किया गया है।

राज्यमंत्री ने कहा कि कश्यप समाज महर्षि कश्यप की संतान के रूप में स्वयं को गौरवान्वित महसूस करता है। उन्होंने समाज के लोगों से महर्षि कश्यप के जीवन दर्शन और उनके बताए मार्ग से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।

‘सनातन परंपरा को समझने के लिए महर्षि कश्यप के जीवन से सीखें’

नरेंद्र कश्यप ने अपने संबोधन में भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति सनातन धर्म की देन है और महर्षि कश्यप का सनातन परंपरा में महत्वपूर्ण स्थान है। उन्होंने लोगों से उनके जीवन दर्शन को समझने और उससे प्रेरणा लेकर जीवन में सही मार्ग पर आगे बढ़ने की बात कही।

कार्यक्रम में धार्मिक विरासत और सामाजिक पहचान को लेकर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि महापुरुषों और ऋषियों की स्मृतियों को सार्वजनिक स्थलों पर संरक्षित करने से आने वाली पीढ़ियों को उनके योगदान के बारे में जानने का अवसर मिलता है।

₹1 करोड़ 41 लाख 13 हजार की लागत से बनेगा स्मारक

जानसठ में प्रस्तावित स्मारक की लागत को लेकर भी राज्यमंत्री ने जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से 1 करोड़ 41 लाख 13 हजार रुपये की लागत से महर्षि कश्यप की भव्य प्रतिमा एवं स्मारक का निर्माण कराया जाएगा।

इतनी बड़ी राशि से बनने वाली परियोजना से स्मारक परिसर के विकास की उम्मीद है। हालांकि निर्माण की विस्तृत रूपरेखा और कार्य पूर्ण होने की समयसीमा की जानकारी कार्यक्रम में साझा नहीं की गई।

स्मारक के निर्माण से जानसठ में महर्षि कश्यप से जुड़ा एक प्रमुख सार्वजनिक स्थल विकसित होने की संभावना है।

कश्यप समाज ने जताई खुशी

महर्षि कश्यप की प्रतिमा और स्मारक निर्माण की घोषणा को लेकर कश्यप समाज के लोगों में उत्साह दिखाई दिया।

कार्यक्रम में समाज के प्रतिनिधियों ने इसे लंबे समय से जुड़ी धार्मिक और सामाजिक भावनाओं से जोड़कर देखा। महर्षि कश्यप को समाज की पहचान और गौरव से जोड़ते हुए वक्ताओं ने कहा कि उनके नाम पर स्मारक बनने से युवा पीढ़ी भी अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के बारे में जानकारी हासिल कर सकेगी।

स्मारक निर्माण की प्रक्रिया शुरू होने को स्थानीय स्तर पर समाज के लिए महत्वपूर्ण अवसर के तौर पर प्रस्तुत किया गया।

नरेंद्र कश्यप का सपा पर राजनीतिक हमला

कार्यक्रम के दौरान राज्यमंत्री नरेंद्र कश्यप ने राजनीतिक मुद्दों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए पिछली सपा सरकार के कार्यकाल को लेकर आरोप लगाए।

नरेंद्र कश्यप ने कहा कि पहले सपा सरकार की पहचान हत्या और दंगों से होती थी। उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार में दंगा कराने वालों को संरक्षण नहीं मिलता और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश अपराध और दंगों से मुक्त हुआ है।

राज्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि सपा सरकार में विकास के पैसों का बंदरबांट होता था, जबकि भाजपा सरकार के दौरान विकास के लिए उपलब्ध धन का पारदर्शिता के साथ इस्तेमाल किया जा रहा है।

ये बयान कार्यक्रम के धार्मिक और सामाजिक एजेंडे के साथ राजनीतिक चर्चा को भी सामने ले आए।

विकास के मुद्दे पर भी भाजपा सरकार को बताया बेहतर

नरेंद्र कश्यप ने अपने संबोधन में प्रदेश सरकार के विकास कार्यों का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार में विकास के लिए आवंटित धन का इस्तेमाल पारदर्शी तरीके से किया जा रहा है। उनके मुताबिक, सरकार का प्रयास है कि विकास योजनाओं का लाभ जनता तक पहुंचे और सरकारी धन का सही उपयोग हो।

हालांकि कार्यक्रम का मुख्य केंद्र महर्षि कश्यप स्मारक का भूमि पूजन था, लेकिन राज्यमंत्री के संबोधन में प्रदेश की कानून-व्यवस्था और विकास को लेकर सरकार की उपलब्धियों का राजनीतिक संदर्भ भी प्रमुख रहा।

रालोद विधायक मदन भैया बोले- जानसठ के लिए सौभाग्य की बात

कार्यक्रम में खतौली विधानसभा के रालोद विधायक मदन भैया भी मौजूद रहे। उन्होंने महर्षि कश्यप की प्रतिमा और स्मारक के निर्माण को जानसठ की जनता के लिए सौभाग्य की बात बताया।

मदन भैया ने कहा कि कस्बे में महर्षि कश्यप की भव्य प्रतिमा और स्मारक का निर्माण होना क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है।

उन्होंने इस परियोजना के लिए स्थानीय लोगों और कश्यप समाज की भावनाओं को भी महत्वपूर्ण बताया।

भूमि पूजन कार्यक्रम में जुटे समाज के प्रमुख लोग

भूमि पूजन कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गणमान्य लोग और स्थानीय प्रतिनिधि मौजूद रहे।

कार्यक्रम के आयोजक ओमदत्त कश्यप और जयप्रकाश कश्यप रहे। इनके साथ कश्यप निषाद संगठन के युवा प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सागर कश्यप भी उपस्थित रहे।

भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश मंत्री रूपेंद्र सैनी, नगर पंचायत अध्यक्ष डॉ. आबिद हुसैन, रालोद नेता अशोक बालियान, अजीत राठी, पूर्व चेयरमैन प्रवेंद्र भड़ाना, यशपाल कश्यप, एलडीबी के चेयरमैन बृजेश रस्तोगी, नेत्रपाल कश्यप और ब्रह्मदत्त कश्यप सहित अन्य लोग कार्यक्रम में मौजूद रहे।

कार्यक्रम का संचालन रामकुमार कश्यप ने किया।

धर्मशाला परिसर में हुआ भूमि पूजन

महर्षि कश्यप की प्रतिमा और स्मारक के लिए चुना गया स्थान कस्बे के मोहल्ला बुधबाजार स्थित महर्षि कश्यप धर्मशाला का परिसर है।

इसी परिसर में धार्मिक विधि-विधान के साथ भूमि पूजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान मौजूद लोगों ने प्रस्तावित स्मारक को लेकर अपनी अपेक्षाएं भी व्यक्त कीं।

धर्मशाला परिसर में बनने वाला स्मारक स्थानीय धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों के लिए भी महत्वपूर्ण स्थल बन सकता है।

महर्षि कश्यप के नाम से जुड़े स्मारकों की बढ़ती मांग

देश के विभिन्न हिस्सों में सामाजिक और धार्मिक समुदायों की ओर से अपने महापुरुषों, संतों और ऐतिहासिक व्यक्तित्वों की स्मृति को संरक्षित करने की मांग समय-समय पर उठती रही है।

सार्वजनिक स्मारक केवल प्रतिमा तक सीमित नहीं होते। यदि उन्हें व्यवस्थित तरीके से विकसित किया जाए तो वे आने वाली पीढ़ियों के लिए इतिहास, संस्कृति और परंपरा को समझने के केंद्र भी बन सकते हैं।

जानसठ में प्रस्तावित महर्षि कश्यप स्मारक को लेकर भी स्थानीय स्तर पर इसी तरह की उम्मीदें दिखाई दे रही हैं।

युवाओं को अपनी विरासत से जोड़ने की कोशिश

कार्यक्रम में महर्षि कश्यप के जीवन दर्शन से सीख लेने पर जोर दिया गया। इसका एक महत्वपूर्ण पहलू युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत से जोड़ना भी है।

आज की पीढ़ी के सामने विभिन्न माध्यमों से जानकारी के अनेक स्रोत मौजूद हैं। ऐसे समय में स्थानीय स्तर पर स्थापित होने वाले स्मारक किसी क्षेत्र के इतिहास और सांस्कृतिक पहचान को प्रत्यक्ष रूप से सामने लाने का माध्यम बन सकते हैं।

महर्षि कश्यप की प्रतिमा और स्मारक के माध्यम से भी उनके धार्मिक महत्व और समाज में उनके योगदान की जानकारी लोगों तक पहुंचाने की संभावना है।

जानसठ की पहचान में जुड़ सकता है नया धार्मिक स्थल

जानसठ पहले से ही धार्मिक और ऐतिहासिक गतिविधियों वाला क्षेत्र रहा है। महर्षि कश्यप के नाम पर प्रस्तावित भव्य स्मारक बनने के बाद क्षेत्र की पहचान में एक और महत्वपूर्ण स्थल जुड़ सकता है।

यदि परिसर को प्रतिमा के साथ पर्याप्त सुविधाओं और जानकारीपूर्ण सामग्री के जरिए विकसित किया जाता है, तो यह स्थानीय लोगों के अलावा बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं और आगंतुकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन सकता है।

स्मारक निर्माण से स्थानीय स्तर पर बढ़ेंगी गतिविधियां

किसी सार्वजनिक स्मारक का निर्माण केवल धार्मिक या सांस्कृतिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं होता। ऐसे स्थलों के विकसित होने से आसपास की सामाजिक गतिविधियां भी बढ़ सकती हैं।

धार्मिक आयोजन, सामाजिक कार्यक्रम और सांस्कृतिक गतिविधियां भविष्य में इस परिसर का हिस्सा बन सकती हैं। इससे जानसठ में स्थानीय स्तर पर एक नया सामुदायिक केंद्र विकसित होने की संभावना बनती है।

हालांकि इसका वास्तविक स्वरूप निर्माण पूरा होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

कार्यक्रम में धार्मिक भावनाओं के साथ राजनीतिक संदेश भी

शनिवार का कार्यक्रम धार्मिक भूमि पूजन से शुरू हुआ, लेकिन मंच से प्रदेश की राजनीति और सरकार के कामकाज को लेकर भी तीखे बयान सामने आए।

नरेंद्र कश्यप ने जहां महर्षि कश्यप के धार्मिक महत्व और कश्यप समाज के गौरव की बात की, वहीं सपा सरकार और वर्तमान भाजपा सरकार की तुलना करते हुए कानून-व्यवस्था और विकास के मुद्दे पर अपनी सरकार का पक्ष रखा।

इस तरह कार्यक्रम में धार्मिक आस्था, सामाजिक पहचान और राजनीतिक संदेश तीनों पहलू दिखाई दिए।

कश्यप समाज के लिए प्रतीकात्मक महत्व

महर्षि कश्यप को कश्यप समाज अपनी परंपरा और पहचान से जोड़ता है। ऐसे में उनके नाम पर सार्वजनिक रूप से भव्य प्रतिमा और स्मारक का निर्माण समाज के लिए भावनात्मक और प्रतीकात्मक महत्व रखता है।

कार्यक्रम में उपस्थित समाज के प्रतिनिधियों ने भूमि पूजन को इसी गौरव से जोड़कर देखा।

स्मारक बनने के बाद यह स्थल महर्षि कश्यप से जुड़ी धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों के आयोजन का केंद्र भी बन सकता है।

आने वाली पीढ़ियों के लिए स्मृति स्थल बनने की उम्मीद

महापुरुषों और धार्मिक व्यक्तित्वों के स्मारक इतिहास और वर्तमान के बीच एक कड़ी का काम करते हैं। नई पीढ़ी के लिए ये स्थल किसी पुस्तक में पढ़ी गई जानकारी को प्रत्यक्ष रूप से देखने और समझने का अवसर देते हैं।

जानसठ में बनने वाला महर्षि कश्यप स्मारक भी इसी भूमिका में विकसित हो सकता है। प्रतिमा के साथ यदि उनके जीवन, धार्मिक परंपरा और सांस्कृतिक योगदान से जुड़ी जानकारी प्रदर्शित की जाती है, तो इसका शैक्षिक महत्व भी बढ़ सकता है।

अब निर्माण कार्य पर रहेगी नजर

भूमि पूजन के बाद अब क्षेत्र के लोगों की नजर स्मारक निर्माण की अगली प्रक्रिया पर रहेगी। सरकार द्वारा घोषित 1 करोड़ 41 लाख 13 हजार रुपये की लागत वाली परियोजना के तहत प्रतिमा और स्मारक का निर्माण कराया जाना है।

स्थानीय लोगों की उम्मीद है कि निर्माण कार्य निर्धारित योजना के अनुसार आगे बढ़े और प्रस्तावित परिसर को आकर्षक एवं उपयोगी स्वरूप दिया जाए।

भूमि पूजन के मौके पर जुटी भीड़ और समाज की भागीदारी से यह स्पष्ट हुआ कि परियोजना को लेकर स्थानीय स्तर पर काफी रुचि है।

जानसठ में महर्षि कश्यप की भव्य प्रतिमा का इंतजार

शनिवार को हुए भूमि पूजन के साथ जानसठ में महर्षि कश्यप की भव्य प्रतिमा और स्मारक निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हुआ। राज्यमंत्री नरेंद्र कश्यप ने कार्यक्रम में महर्षि कश्यप को भारतीय धार्मिक परंपरा का श्रेष्ठ ऋषि बताते हुए उनके जीवन दर्शन से प्रेरणा लेने की बात कही।

प्रदेश सरकार की ओर से ₹1,41,13,000 की लागत से प्रस्तावित यह स्मारक कश्यप समाज के लिए धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कार्यक्रम में रालोद विधायक मदन भैया सहित विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग मौजूद रहे।

अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि प्रस्तावित स्मारक का निर्माण किस स्वरूप में होता है और पूरा होने के बाद यह जानसठ के धार्मिक-सांस्कृतिक परिदृश्य में किस तरह की भूमिका निभाता है।

जानसठ के मोहल्ला बुधबाजार स्थित महर्षि कश्यप धर्मशाला परिसर में महर्षि कश्यप की भव्य प्रतिमा और स्मारक निर्माण के लिए भूमि पूजन किया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप ने कार्यक्रम में बताया कि प्रदेश सरकार की ओर से 1 करोड़ 41 लाख 13 हजार रुपये की लागत से इस परियोजना का निर्माण कराया जाएगा। कार्यक्रम में महर्षि कश्यप के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर चर्चा हुई तथा कश्यप समाज की ओर से इसे गौरव का अवसर बताया गया। खतौली विधानसभा के रालोद विधायक मदन भैया ने भी स्मारक निर्माण को जानसठ की जनता के लिए सौभाग्य की बात कहा। कार्यक्रम में ओमदत्त कश्यप, जयप्रकाश कश्यप, डॉ. सागर कश्यप, रूपेंद्र सैनी, डॉ. आबिद हुसैन, अशोक बालियान, अजीत राठी, प्रवेंद्र भड़ाना, यशपाल कश्यप, बृजेश रस्तोगी, नेत्रपाल कश्यप और ब्रह्मदत्त कश्यप समेत अनेक लोग मौजूद रहे।



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