महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में पिछले तीन दिन से कई जीवनरक्षक दवाओं का स्टॉक खत्म होने से गंभीर मरीजों के उपचार पर असर पड़ रहा है। हालत यह है कि मौत और जिंदगी के बीच जूझते हुए आने वाले मरीजों को तत्काल दवा उपलब्ध नहीं हो पा रही है। मजबूरन डॉक्टरों को तीमारदारों से बाहर मेडिकल स्टोर से दवाएं मंगवानी पड़ रही हैं।
मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टरों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इमरजेंसी में रोजाना गंभीर हालत में मरीज पहुंच रहे हैं, लेकिन कई जरूरी इंजेक्शन और दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में मरीजों को तुरंत उपचार देने में दिक्कत हो रही है। डॉक्टरों का कहना है कि कई बार हालत बेहद नाजुक होती है और हर मिनट अहम होता है, लेकिन दवा उपलब्ध न होने से उपचार प्रभावित हो रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, करीब दस प्रकार की दवाओं की कमी की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दे दी गई है। इसके बावजूद अब तक पर्याप्त सप्लाई नहीं पहुंच सकी है। इमरजेंसी में भर्ती मरीजों के परिजनों को बाहर से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं, जिससे आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है।
यह जीवनरक्षक दवाएं हैं खत्म
एड्रीनेलिन
दिल की धड़कन तेज करने और शरीर में ऑक्सीजन व रक्त प्रवाह बढ़ाने में प्रयोग होती है। आपात स्थिति में अचानक ऊर्जा देने का काम करती है।
नॉर-एड्रीनेलिन
रक्तचाप बढ़ाने और हृदय गति नियंत्रित करने में उपयोगी दवा है। गंभीर स्थिति में मरीज को स्थिर रखने में मदद करती है।
मिडाजोलम : सर्जरी से पहले बेहोशी, चिंता कम करने और गंभीर दौरों को नियंत्रित करने में इस्तेमाल होती है।
डोपामाइन
हार्ट अटैक, सेप्सिस और अचानक गिरे ब्लड प्रेशर की स्थिति में मरीज की हालत संभालने के लिए दी जाती है। यह हृदय को रक्त पंप करने में मदद करती है।
कुछ जीवनरक्षक दवाएं खत्म हो गई थीं। डिपो को डिमांड भेज दी गई है। आश्वासन मिला है कि रविवार तक सभी दवाओं की सप्लाई मिल जाएगी। – डॉ. सचिन माहुर, सीएमएस, मेडिकल कॉलेज
