सटोरियों के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन-720 में पुलिस ने कई बड़े सट्टेबाजों को पकड़ा। इनके पास से नकदी के साथ करीब 150 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन का रिकॉर्ड भी मिला, लेकिन दो माह बाद भी पुलिस इस रकम के लेनदेन की कड़ी को जोड़ने में नाकाम रही है। अब तक यह साफ नहीं हो सका है कि सट्टे की यह रकम कहां-कहां पहुंचाई जा रही थी और इसका अंतिम सिरा कहां है।

शनिवार को भी सट्टा गिरोह के खुलासे में 37 लाख रुपये के लेनदेन का पता चला। इस गिरोह का मास्टरमाइंड प्रेम खटीक पहले से वांछित है। इससे पहले नवाबाद पुलिस ने भी 100 करोड़ रुपये के सट्टा गिरोह का भंडाफोड़ किया था। वहीं करीब पांच करोड़ रुपये से अधिक के क्वाइन भी बरामद किए जा चुके हैं।

ऑपरेशन-720 के तहत जिलेभर में सटोरियों के करीब 150 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन का खुलासा हुआ था। बरामद रजिस्टर और रिकॉर्ड से 69 बैंक खातों, 46 डेबिट कार्ड और मोबाइल फोन के जरिये हुए यूपीआई लेनदेन की जानकारी पुलिस को मिली थी। इसके बावजूद डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे की जांच अब तक गति नहीं पकड़ सकी है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक शुरुआती जांच में सामने आया था कि सटोरियों के पास मिले कई बैंक खाते दूसरे लोगों के नाम पर खोले गए थे लेकिन इन खातों से वास्तविक लोगों को रकम भेजी गई। डेबिट कार्ड, मोबाइल फोन और नेट बैंकिंग के माध्यम से भी लेनदेन किया गया। इसके बाद भी पुलिस इन सभी कड़ियों को आपस में नहीं जोड़ सकी है।

कुर्की के दावों पर भी उठे सवाल

ऑपरेशन-720 शुरू होने के समय पुलिस अधिकारियों ने सटोरियों की संपत्ति कुर्क करने तक की कार्रवाई के दावे किए थे लेकिन समय बीतने के साथ यह कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। पुलिस अभी तक कई आरोपियों के बैंक खातों और वित्तीय नेटवर्क का पता नहीं लगा सकी है। इस मामले में वांछित धर्मेंद्र साहू, हर्ष साहू, निशांत यादव उर्फ रोलेक्स, अरुण यादव, अंकित यादव (पार्षद पति), पप्पू यादव, आकाश, सोनू समेत कई आरोपी अभी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।

इनका यह है कहना

एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति का कहना है कि वांछित आरोपियों की तलाश की जा रही है। उनके बैंक खातों समेत अन्य वित्तीय गतिविधियों की जानकारी भी जुटाई जा रही है।

इन सवालों के नहीं मिले जवाब

150 करोड़ रुपये का लेनदेन किन-किन खातों से हुआ?

46 डेबिट कार्ड किन लोगों के नाम पर जारी हुए और इनके जरिये कहां-कहां रकम निकाली गई?

यूपीआई के माध्यम से भेजी गई रकम आखिर किन खातों में पहुंची?

बरामद मोबाइल फोन में किस तरह के लेनदेन का रिकॉर्ड मिला?

नामजद आरोपियों में कौन-कौन वित्तीय नेटवर्क में सीधे शामिल थे?

बरामद किए गए क्वाइन के लिए किन खातों से भुगतान किया गया?



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