Jhansi: Governor honors farmer's daughter

कल्पना शर्मा।
– फोटो : संवाद

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एक ओर पिता खेतों में पसीना बहाकर परिवार की उम्मीदों को सींचते रहे, तो दूसरी ओर बेटी कल्पना शर्मा किताबों के पन्नों पर अपनी मेहनत से सफलता की फसल लहलहाती रही। बेटी की प्रतिभा ने ऐसी चमक बिखेरी कि उपलब्धियों के सितारे उसके नाम के साथ जुड़ते चले गए। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से एमएससी एंडोक्राइनोलॉजी की पढ़ाई करने वाली कल्पना को इसी वर्ष अगस्त माह में राज्यपाल की ओर से रजत पदक से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही वह विश्वविद्यालय स्तर पर अपने अध्ययनरत कोर्स में दो स्वर्ण पदक भी हासिल कर चुकी हैं। किसान पिता के संघर्ष और बेटी की लगन की यह कहानी शिक्षा के प्रति समर्पण की मिसाल बन गई है।


कल्पना शर्मा शुरू से ही पढ़ाई में होनहार रही हैं। उन्होंने इंटरमीडिएट की परीक्षा में 92 प्रतिशत अंक हासिल कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। इसके बाद विज्ञान विषय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर उच्च शिक्षा के लिए बुंदेलखंड विश्वविद्यालय का रुख किया। कल्पना की सफलता के पीछे उनके किसान पिता का संघर्ष भी जुड़ा है। खेती पर निर्भर परिवार में बच्चों की शिक्षा और भविष्य की जिम्मेदारियां निभाना आसान नहीं होता। मौसम की अनिश्चितता और खेती की चुनौतियों के बीच पिता ने मेहनत जारी रखी, ताकि उनकी बेटी पढ़-लिखकर अपने पैरों पर खड़ी हो सके। परिवार में तीन बहनें और एक छोटा भाई है।

पढ़ाई के साथ पढ़ाने का भी जुनून

कल्पना को पढ़ने के साथ दूसरों को पढ़ाना भी पसंद है। यही वजह रही कि उन्होंने अपनी पढ़ाई के दौरान ही कॉलेज के विद्यार्थियों को पढ़ाना शुरू कर दिया था। विषयों को समझने और उन्हें सरल तरीके से समझाने की उनकी रुचि ने शिक्षण को उनके जीवन का अहम हिस्सा बना दिया। वर्तमान में वह नीट की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को जीव विज्ञान पढ़ाती हैं।

बीएड, सीटीईटी और इंस्पायर स्कॉलरशिप भी हासिल की

कल्पना ने अपने शैक्षणिक सफर में कई अन्य उपलब्धियां भी अर्जित की हैं। उन्होंने बीएड की पढ़ाई पूरी की और केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (सीटीईटी) भी उत्तीर्ण की। इसके अलावा इनको इंस्पायर स्कॉलरशिप प्राप्त हुई।

प्रोफेसर बनकर विद्यार्थियों का भविष्य संवारना है सपना

कल्पना की मंजिल अभी दूर है। वह भविष्य में प्रोफेसर बनना चाहती हैं। विद्यार्थियों को पढ़ाना, उन्हें विषय की गहराई समझाना और उनके भविष्य को दिशा देना उन्हें संतुष्टि देता है। इसी लगाव के चलते वह पढ़ाई के साथ-साथ शिक्षण कार्य से जुड़ी रहीं और अब नीट के विद्यार्थियों को जीव विज्ञान पढ़ा रही हैं।



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