बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) के लिए भूमि क्रय के दौरान कुछ किसानों के बैंक खाते की जानकारी गलत दर्ज होने से मुआवजे की रकम दूसरे लोगों के खातों में पहुंच गई। ऐसे कई मामले सामने आने के बाद प्रशासन को संबंधित बैंक खातों से राशि वापस मंगवाने के लिए मशक्कत करनी पड़ी। इसके बाद ही वास्तविक काश्तकारों के खातों में भुगतान कराया जा सका। इन घटनाओं के बाद अब भुगतान प्रक्रिया में विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
नोएडा की तर्ज पर झांसी में बीडा के माध्यम से अत्याधुनिक औद्योगिक शहर विकसित किया जा रहा है। इसके लिए 33 गांवों की 62,599 एकड़ भूमि आपसी सहमति से खरीदी जा रही है। अधिकांश किसानों को बैनामा होने के एक सप्ताह से 10 दिन के भीतर भुगतान मिल रहा है, लेकिन कुछ मामलों में बैंक खाता संख्या गलत दर्ज होने से मुआवजे की राशि दूसरे खातों में चली गई। जब तय समय में किसानों के खातों में रकम नहीं पहुंची तो उन्होंने जिला प्रशासन से शिकायत की। जांच में बैंक खाते की त्रुटि सामने आने पर प्रशासन ने संबंधित बैंक से राशि वापस मंगवाई और वास्तविक विक्रेता के खाते में जमा कराई। हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया में किसानों को अतिरिक्त इंतजार करना पड़ा। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) पल्लवी मिश्रा ने बताया कि कुछ मामलों में नाम और बैंक विवरण में त्रुटियां मिली थीं, जिन्हें दुरुस्त कराकर संबंधित किसानों को भुगतान करा दिया गया है। भविष्य में ऐसी गलती न हो, इसके लिए भुगतान से पहले सभी विवरणों का गहन सत्यापन कराया जा रहा है।
त्रुटियों पर शासन ने मांगी रिपोर्ट
संयुक्त सचिव वीएन तिवारी ने जिलाधिकारी को भेजे पत्र में कहा है कि बीडा के लिए भूमि क्रय प्रक्रिया में कई गंभीर त्रुटियां सामने आई हैं। उच्चाधिकारियों को लिखित और मौखिक रूप से अवगत कराने के बावजूद इनका निराकरण नहीं किया गया और न ही जांच के लिए कोई समिति गठित की गई। चूंकि मामला वित्तीय है, इसलिए शासकीय धन के दुरुपयोग की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता।
पत्र में उल्लेख है कि झांसी के विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी के माध्यम से प्रतिकर, स्टांप और निबंधन मद में अब तक करीब चार हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। शासन ने पूरे प्रकरण पर संस्तुति सहित विस्तृत आख्या शीघ्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
केस-1
राजापुर के एक किसान को करीब 2.78 लाख रुपये का भुगतान होना था, लेकिन बैनामे के दौरान गलत बैंक खाता संख्या दर्ज होने से राशि दूसरे खाते में चली गई। बाद में रकम वापस लेकर किसान के खाते में भेजी गई।
केस-2
खजुराहा बुजुर्ग के एक काश्तकार को 15 लाख रुपये का भुगतान होना था। गलत खाता संख्या दर्ज होने से राशि दूसरे व्यक्ति के खाते में पहुंच गई। शिकायत के बाद राशि वापस मंगाकर सही खाते में भेजी गई।
केस-3
राजापुर के एक किसान के 3.50 लाख रुपये मध्य प्रदेश के करैरा निवासी युवक के खाते में पहुंच गए। राजस्व विभाग के अधिकारी करैरा स्थित बैंक पहुंचे। आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर बैंक से डिमांड ड्राफ्ट प्राप्त किया गया और बाद में किसान के खाते में भुगतान कराया गया।
