विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट) एडीजे देवाशीष की अदालत ने बहुचर्चित गैंगस्टर मामले में सरदार सिंह गुर्जर समेत 14 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष गैंगस्टर एक्ट के तहत लगाए गए आरोपों को ठोस साक्ष्यों से साबित नहीं कर सका। कोर्ट ने गैंग चार्ट के अनुमोदन और विवेचना की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। मामले के 12 आरोपी अलग-अलग जेलों में बंद हैं, जबकि दो जमानत पर हैं। विशेष न्यायाधीश ने संबंधित दो गैंगस्टर मामलों का एक साथ निस्तारण करते हुए फैसला सुनाया।
नवाबाद थाने में तत्कालीन निरीक्षक अजय कुमार सिंह की ओर से 13 मार्च 2021 को गैंगस्टर एक्ट के तहत लकारा निवासी सरदार सिंह गुर्जर, उसके भाई राव राजा, राजेंद्र गुर्जर, भरत सिंह, प्रह्लाद गुर्जर, उधम सिंह गुर्जर, भूपेंद्र गुर्जर उर्फ पुष्पेंद्र, सोनू गुप्ता उर्फ सचिन, कमलेश यादव, नीतेश पटवारी उर्फ धांधू, सनम उर्फ मांगे जाट, रोहित, गौरव और सागर राणा के खिलाफ दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज कराई गई थीं। इनमें सरदार सिंह गुर्जर को गिरोह का सरगना और अन्य आरोपियों को गिरोह के सदस्य के रूप में नामजद किया गया था। अभियोजन के अनुसार, 21 जुलाई 2018 को कारोबारी संजय वर्मा पर हुए जानलेवा हमले को आधार बनाकर गैंगस्टर की कार्रवाई की गई थी। कारोबारी पर सरेआम फायरिंग की गई थी, जिसमें उनके सुरक्षाकर्मी जय गोस्वामी की मौके पर मौत हो गई थी।
घटना के तीन साल बाद गैंगस्टर लगाने पर सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से 13 गवाह पेश किए गए। अदालत ने घटना के करीब तीन साल पांच माह बाद गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई किए जाने पर सवाल उठाया। कोर्ट ने कहा कि प्रस्तुत मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्य गैंगस्टर एक्ट के आरोपों की पुष्टि नहीं कर सके।
अदालत ने विवेचना में भी कई अनियमितताएं पाईं। अभियोजन की ओर से तर्क दिया गया कि विवेचना की कमियों का लाभ आरोपियों को नहीं दिया जाना चाहिए। इस पर कोर्ट ने कहा कि यदि अभियोजन साक्ष्यों के आधार पर आरोप साबित कर देता तो केवल विवेचना की कमियों को नजरअंदाज किया जा सकता था, लेकिन मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्य आरोप साबित करने में सक्षम नहीं रहे। अदालत ने यह भी पाया कि गैंगस्टर मामले में कुछ ऐसे लोगों को भी आरोपी बनाया गया, जो मूल मुकदमे में शामिल नहीं थे।
आर्थिक लाभ का साक्ष्य नहीं मिला
न्यायालय ने कहा कि आरोपियों की कथित आपराधिक गतिविधियों से किसी अनुचित आर्थिक, भौतिक या अन्य लाभ प्राप्त होने का कोई साक्ष्य सामने नहीं आया। लोक व्यवस्था को छिन्न-भिन्न करने के संबंध में भी अभियोजन की ओर से कोई स्वतंत्र साक्षी पेश नहीं किया गया। अदालत ने कहा कि केवल पहले दर्ज किसी मुकदमे के आधार पर गैंगस्टर एक्ट में दोषसिद्धि नहीं की जा सकती। इसके लिए अधिनियम में निर्धारित आवश्यक तत्वों को स्वतंत्र और विश्वसनीय साक्ष्यों के माध्यम से साबित करना जरूरी है। अभियोजन पक्ष इन आवश्यक तत्वों को साबित करने में विफल रहा।
गैंग चार्ट के अनुमोदन की प्रक्रिया पर भी सवाल
अदालत ने गैंग चार्ट के अनुमोदन की प्रक्रिया पर भी कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट के अनुसार, सक्षम अधिकारियों ने गैंग चार्ट का अनुमोदन उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना यंत्रवत किया। पत्रावली पर ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला, जिससे यह साबित हो कि जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने संयुक्त बैठक में विचार-विमर्श के बाद गैंग चार्ट को मंजूरी दी थी। अदालत ने यह भी कहा कि गैंग चार्ट के अनुमोदन के समय स्पष्ट कारण दर्ज नहीं किए गए। विवेचना में भी इस बात के ठोस साक्ष्य नहीं जुटाए गए कि आरोपियों ने अनुचित आर्थिक या अन्य लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से अपराध किए थे।
आधारभूत मामले में कई आरोपी पहले ही हो चुके दोषमुक्त
कारोबारी संजय वर्मा पर जानलेवा हमले के मामले को आधार बनाकर सरदार सिंह गुर्जर समेत आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई थी। अदालत के मुताबिक, इस मूल मामले में सरदार सिंह गुर्जर, भरत सिंह, राव राजा, नीतेश पटवारी, सनम उर्फ मांगे, रोहित उर्फ रोहिताश, गौरव उर्फ मोंटी और सागर राणा को इसी साल 29 मई को दोषमुक्त किया जा चुका है। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि मूल मामले में दोषमुक्ति अपने आप गैंगस्टर मामले का निर्धारण नहीं करती। गैंगस्टर एक्ट के मामले में मुख्य प्रश्न यह है कि अधिनियम के आवश्यक तत्व अभियोजन पक्ष ने साक्ष्यों के आधार पर साबित किए या नहीं।
इटावा जेल में बंद है सरदार सिंह गुर्जर
सरदार सिंह गुर्जर इटावा जेल में बंद है। सनम उर्फ जाट, नीतेश पटवारी उर्फ धांधू झज्जर जेल और कमलेश यादव फतेहपुर जेल में बंद हैं। वहीं गौरव, सागर राणा, प्रह्लाद गुर्जर, उधम सिंह गुर्जर, राजेंद्र गुर्जर, राव राजा, भूपेंद्र गुर्जर उर्फ पुष्पेंद्र और सोनू गुप्ता भी अलग-अलग जेलों में बंद हैं। रोहित उर्फ रोहिताश और गौरव उर्फ मोंटी जमानत पर हैं।
