जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) के तहत प्रसूताओं को पौष्टिक आहार के लिए मिलने वाली राशि के भुगतान में देरी हो रही है। इससे योजना का लक्ष्य प्रभावित हो रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जिस दिन प्रसव होता है, उसी दिन भुगतान के लिए रजिस्ट्रेशन कर दिया जाता है, मगर देरी ट्रेजरी से होती है। जननी सुरक्षा योजना के तहत तय वित्तीय सहायता राशि लाभार्थियों तक समय पर नहीं पहुंच रही है। भुगतान के लिए प्रसूताओं को चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। यह देरी न केवल योजना के उद्देश्यों में बाधा डाल रही है, बल्कि भरोसे को भी कम कर रही है।
जिला महिला अस्पताल की 40 फीसदी प्रसूताओं का भुगतान लंबित है। इसकी वजह कुछ के खाते का आईएफएससी कोड का मिलान नहीं होना है, तो किसी का संयुक्त खाता होना बताया जा रहा है। दावा है कि जिले की 30 फीसदी प्रसूताओं का योजना के तहत भुगतान रुका हुआ है। जिसके भुगतान की प्रक्रिया चल रही है। अधिकारियों का कहना है कि योजना का लाभ तो प्रसव के बाद अथवा जच्चा-बच्चा के घर जाते समय मिलना चाहिए। जिसके तहत ही प्रसव होते ही ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर दिया जाता है। जिसकी एक प्रति ट्रेजरी भुगतान के लिए जाती है। ट्रेजरी में भुगतान की प्रक्रिया में समय लगता है।
यह वजहें हैं भुगतान में देरी की
अधिकारियों का कहना है नया पोर्टल होने की वजह से कई तकनीकी खामियां भी बाधा बन रही है। कई प्रसूताओं का आईएफएससी कोड मैच नहीं कर रहा है, तो किसी ने पति के संयुक्त खाता नंबर दे दिया है। चूंकि योजना महिलाओं के लिए हैं, इसलिए संयुक्त खाते में धनराशि ट्रांसफर नहीं हो रही है।
योजना का उद्देश्य
जननी सुरक्षा योजना का मुख्य उद्देश्य सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देना, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करना और प्रसवोत्तर माताओं को वित्तीय व पोषण संबंधी सहायता प्रदान करना है। योजना के तहत, सरकारी अस्पतालों में निशुल्क प्रसव के साथ शहर की प्रसूता को 1,000 रुपये और ग्रामीण क्षेत्र की प्रसूता को 1,400 रुपये दिए जाते हैं। 0-वर्जन प्रसव होते ही योजना की राशि का भुगतान करने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण कर दिया जाता है। अब ट्रेजरी से भुगतान में समय लग जाता है। वैसे योजना की राशि के भुगतान का आंकड़ा 69 फीसदी पहुंच गया है। -डॉ. एनके जैन, नोडल अधिकारी, जेएसवाई
