जिलाधिकारी गौरांग राठी रविवार को बामौर के डुमरई गांव में निर्माणाधीन राजकीय हाईस्कूल के भवन का निरीक्षण करने पहुंचे। करीब 1.32 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस भवन के कुछ हिस्सों पर उन्होंने हथौड़ा चलाया, तो उसकी पोल खुल गई। डीएम ने दीवार की मजबूती परखी तो एक हिस्से की गुणवत्ता प्रथमदृष्टया संतोषजनक नहीं मिली। बीम से सरिया बाहर निकला मिला और भवन के ऊपरी हिस्से की कास्टिंग में भी खामियां सामने आईं। टॉयलेट ब्लॉक में इस्तेमाल कुछ ईंटें भी मानक के अनुरूप नहीं पाई गईं।
डीएम ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल सुधार कराने के निर्देश देते हुए स्पष्ट कर दिया कि निर्माण में गुणवत्ता में कमी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं होगी। ग्राम डुमरई में समग्र शिक्षा के तहत यूपी सिडको द्वारा 132.77 लाख रुपये की स्वीकृत लागत से राजकीय हाईस्कूल भवन का निर्माण कराया जा रहा है। परियोजना को 31 अक्तूबरर, 2026 तक पूरा किया जाना है और अब तक करीब 80 प्रतिशत कार्य होने की जानकारी दी गई। भवन में कक्षा-कक्ष, विज्ञान प्रयोगशाला, आर्ट क्राफ्ट कक्ष, प्रधानाचार्य कक्ष, कार्यालय, कंप्यूटर लैब और टॉयलेट ब्लॉक बनाए जा रहे हैं।
जिलाधिकारी ने हथौड़े से दीवार की गुणवत्ता जांचने के साथ भवन के विभिन्न हिस्सों का निरीक्षण किया। एक कक्षा-कक्ष की दीवार के कुछ हिस्से की गुणवत्ता प्रथमदृष्टया संतोषजनक नहीं पाई गई। खिड़कियों और जालियों की जांच के दौरान जाली की मोटाई डीपीआर के अनुरूप मिली, लेकिन फिक्सिंग और वेल्डिंग की फिनिशिंग ठीक नहीं थी। इस पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताते हुए कार्य को बेहतर ढंग से कराने के निर्देश दिए।
दीवार में मिली नमी
टॉयलेट ब्लॉक में प्रयुक्त कुछ ईंटों की गुणवत्ता भी प्रथमदृष्टया मानक के अनुरूप नहीं मिली। जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्माण में मानकविहीन सामग्री का इस्तेमाल न किया जाए और गुणवत्तापूर्ण सामग्री ही लगाई जाए। भवन के एक कक्ष की दीवार में नमी मिलने पर उसे दूर करने के प्रभावी उपाय करने तथा छत पर ब्रिक कोबा के माध्यम से वॉटरप्रूफिंग का कार्य शीघ्र पूरा कराने को कहा। निरीक्षण के दौरान उप जिलाधिकारी सुनील कुमार, जिला विद्यालय निरीक्षक रती वर्मा, यूपी सिडको के प्रोजेक्ट मैनेजर रजनीश कुमार श्रीवास्तव, सहायक अभियंता सौरभ पिपरैया सहित संबंधित अधिकारी और स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे।
चहारदीवारी नहीं, ग्राम निधि से होगी तार फेंसिंग
निरीक्षण के दौरान विद्यालय भवन और परिसर की सुरक्षा का मुद्दा भी सामने आया। परियोजना प्रबंधक ने बताया कि स्वीकृत परियोजना में चहारदीवारी का प्रावधान नहीं है। जिलाधिकारी ने विद्यालय की भूमि की सुरक्षा को जरूरी बताते हुए निर्धारित प्रावधानों के तहत ग्राम निधि से नियमानुसार तार फेंसिंग कराने के निर्देश दिए।
