जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) कार्यालय में सोमवार अपराह्न अनुशासनिक पूछताछ के दौरान एक सफाई कर्मचारी की तबीयत बिगड़ने से हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है कि कर्मचारी को सूद पर रुपये देने पर डीपीआरओ डॉ. बाल गोविंद श्रीवास्तव ने फटकारा था। तभी कर्मचारी अचानक सीने में दर्द की शिकायत करते हुए जमीन पर गिर पड़ा। आनन-फानन में उसे महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।

दो दिन पहले पुलिस भी कार्यालय पहुंची थी

जानकारी के अनुसार, विकासखंड बड़ागांव की ग्राम पंचायत बचावली में तैनात सफाई कर्मचारी बाबूलाल तिवारी पर अपने साथी कर्मचारी सत्यप्रकाश को ब्याज पर 50 हजार रुपये देने का आरोप है। बताया गया कि रुपये के बदले लिया गया गारंटी चेक बाउंस हो गया था, जिसके बाद बाबूलाल ने सत्य प्रकाश के खिलाफ थाने में शिकायत की थी। इस मामले में पुलिस दो दिन पहले डीपीआरओ कार्यालय जांच के लिए पहुंची थी।

कर्मचारियों ने पहुंचाया अस्पताल

सरकारी सेवा नियमावली में किसी भी कर्मचारियों की ओर से निजी तौर पर सूदखोरी या ब्याज पर लेन-देन करना प्रतिबंधित है। इसी शिकायत के संबंध में डीपीआरओ डॉ. बाल गोविंद श्रीवास्तव ने दोपहर बाद करीब 3:15 बजे बाबूलाल को कार्यालय तलब किया था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बाबूलाल अपने भतीजे के साथ कार्यालय पहुंचा था। पूछताछ के दौरान डीपीआरओ उसे सरकारी कर्मचारी होकर इस प्रकार के कार्यों में संलिप्त रहने पर फटकार लगा रहे थे। इसी दौरान बाबूलाल अचानक पसीने से तर हो गया और बेहोश होकर गिर पड़ा। तभी पुलिस बुला ली गई। कार्यालय कर्मचारियों ने तत्काल एंबुलेंस बुलाकर उसे मेडिकल कॉलेज पहुंचाया।

बाबूलाल के खिलाफ सूदखोरी की शिकायतें मिल रही थीं। उसे पहले भी इस तरह की गतिविधियों से बचने की हिदायत दी गई थी। उसे केवल स्पष्टीकरण और समझाने के लिए बुलाया गया था। बातचीत के दौरान अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई। – डॉ. बाल गोविंद श्रीवास्तव, डीपीआरओ

बाबूलाल को दिल का दौरा पड़ा है। फिलहाल उसे आईसीयू में भर्ती कर विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उपचार दिया जा रहा है। – डॉ. सचिन माहुर, सीएमएस, मेडिकल कॉलेज

सरकारी कर्मचारी सूद पर नहीं दे सकते रुपये

यदि कोई कर्मचारी ब्याज पर रुपये देने का नियमित काम करता है या चेक या दस्तावेज लेकर वसूली करता है। वित्तीय विवाद में फंसता है तो विभाग इसे आचरण नियमों के विपरीत मान सकता है। ऐसे मामले में उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमावली, 1956 तथा उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली का हवाला देकर कार्रवाई की जाती है।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

अभी अभी की खबरें