मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक में इन दिनों रक्त का गंभीर संकट गहरा गया है। हालत यह है कि शनिवार को रोगियों को चढ़ाने योग्य सिर्फ तीन यूनिट ब्लड ही उपलब्ध था। इससे मरीजों के परिजनों को रक्त के लिए मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल के बीच भटकना पड़ रहा है। संकट की मुख्य वजह 110 यूनिट ब्लड की नेट (न्यूक्लिक एसिड टेस्टिंग) जांच रिपोर्ट का चार दिन से अलीगढ़ से न आना बताई जा रही है।

मेडिकल कॉलेज में रक्तदान के बाद ब्लड की प्रारंभिक जांच स्थानीय स्तर पर की जाती है। इसके बाद नेट जांच के लिए सैंपल अलीगढ़ भेजे जाते हैं। रिपोर्ट सामान्य आने के बाद ही ब्लड मरीजों को चढ़ाया जाता है। चार दिन से रिपोर्ट न मिलने के कारण 110 यूनिट ब्लड उपयोग में नहीं लाया जा सका है।

शनिवार को ब्लड बैंक में सिर्फ तीन यूनिट ब्लड उपलब्ध था, जिसमें बी पॉजिटिव का एक और एबी पॉजिटिव की दो यूनिट शामिल थीं। इससे मरीजों के तीमारदारों की परेशानियां बढ़ गई हैं। गाइडलाइन के अनुसार गर्भवती महिलाओं के लिए प्रत्येक ब्लड ग्रुप की कम से कम दो यूनिट रिजर्व रहनी चाहिए, लेकिन वर्तमान में यह व्यवस्था भी नहीं है।

स्त्री रोग विभाग में भर्ती सुधा देवी और इमरजेंसी में भर्ती स्वीटी को जिला अस्पताल से ब्लड उपलब्ध कराया गया। वहीं, इरफान ने बताया कि उसकी भतीजी की हालत गंभीर है। डॉक्टरों ने जल्द ब्लड चढ़ाने की जरूरत बताई है, लेकिन चार दिन से वह मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल के चक्कर काट रहा है। इसके बावजूद ब्लड नहीं मिल पा रहा।

सैंपल और पत्र न होने से लौट रहे तीमारदार

जिला अस्पताल ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. सुधीर गुप्ता ने बताया कि मेडिकल कॉलेज से कई तीमारदारों को सिर्फ ब्लड ग्रुप लिखी पर्ची देकर भेजा जा रहा है। न तो ब्लड सैंपल दिया जा रहा है और न ही कोई अनुरोध पत्र। बिना सैंपल के ब्लड देना संभव नहीं है, क्योंकि थोड़ी सी भी गड़बड़ी मरीज की जान के लिए खतरा बन सकती है।

जिला अस्पताल में उपलब्ध ब्लड

ए पॉजिटिव : 15 यूनिट

ए निगेटिव : 01 यूनिट

बी पॉजिटिव : 12 यूनिट

बी निगेटिव : 01 यूनिट

एबी पॉजिटिव : 05 यूनिट

एबी निगेटिव : 00 यूनिट

ओ पॉजिटिव : 23 यूनिट

ओ निगेटिव : 03 यूनिट

क्या होती है नेट जांच

नेट (न्यूक्लिक एसिड टेस्टिंग) अत्याधुनिक जांच प्रक्रिया है। इससे एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी जैसे संक्रमणों का शुरुआती चरण में भी पता लगाया जा सकता है। इस जांच में वायरस के डीएनए और आरएनए की पहचान कर संक्रमण की पुष्टि की जाती है।

अलीगढ़ में जांच करने वाली कार्यदायी संस्था से लगातार संपर्क किया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद ही ब्लड मरीजों को दिया जा सकेगा। – डॉ. एमएल आर्या, ब्लड बैंक प्रभारी, मेडिकल कॉलेज



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