झांसी। जिला प्रभारी मंत्री जयवीर सिंह बृहस्पतिवार शाम मेडिकल कॉलेज में व्यवस्थाओं का जायजा लेने अचानक पहुंचे। वह सीधे सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक के डायलिसिस वार्ड में गए। यहां भर्ती रोगियों के परिजनों ने आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद बाहर से दवाएं और डायलिसिस संबंधी सामान मंगवाने की शिकायत की। इस पर मंत्री ने मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुधीर कुमार को जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई के निर्देश दिए।

शाम करीब 4:45 बजे प्रभारी मंत्री पहली बार मेडिकल कॉलेज पहुंचे। उनका काफिला सीधे सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक पहुंचा। यहां उन्होंने डायलिसिस वार्ड में भर्ती रोगियों और उनके परिजनों से सुविधाओं व दवाओं की उपलब्धता के बारे में जानकारी ली। बेड नंबर छह पर भर्ती बाबूराम निवासी पर्वतपुर, जालौन के पुत्र महेंद्र ने मंत्री को बताया कि उसके पिता का पांच दिन पहले आयुष्मान कार्ड बना है। इसके बावजूद डायलिसिस के लिए उससे बाहर से 3,300 रुपये की दवाएं मंगवाई गईं। उसने मंत्री को दवाएं भी दिखाईं।

वहीं, खातीबाबा निवासी हुसना बेगम के पुत्र आबिद ने बताया कि उसकी मां का आयुष्मान कार्ड से उपचार चल रहा है। इसके बावजूद जरूरी दवाएं बाहर से मंगवाई जा रही हैं। उसने डायलिसिस के लिए बाहर से खरीदा गया फिल्टर भी मंत्री को दिखाया। करीब 40 मिनट तक जायजा लेने के बाद प्रभारी मंत्री ने कहा कि आयुष्मान कार्ड से उपचार के बावजूद जरूरी दवाएं बाहर से मंगवाने की शिकायत गंभीर है। उन्होंने प्राचार्य को मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

प्राचार्य ने मांगी दोनों कार्डों की स्टेटस रिपोर्ट

प्राचार्य डॉ. सुधीर कुमार ने बताया कि आयुष्मान प्रभारी को दोनों रोगियों के कार्ड का स्टेटस पता कर पूरी रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। जांच में यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी सामने आती है तो जिम्मेदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

इंडेंट में आया फिल्टर, फिर बाहर से क्यों खरीदा?

डायलिसिस वार्ड में तैनात जूनियर डॉक्टर ने बताया कि हुसना बेगम की डायलिसिस के लिए आयुष्मान कार्ड के तहत फिल्टर मंगाया गया था। इसका इंडेंट नंबर 01871 है। उसके अनुसार इंडेंट से मिले फिल्टर और दवा से ही हुसना बेगम की डायलिसिस हुई है। ऐसे में बाहर से फिल्टर व दवा खरीदने की जरूरत क्यों पड़ी, इसकी भी जांच की जा रही है।

जन औषधि केंद्र पर 200 के मानक के मुकाबले 179 दवाएं मिलीं

प्रभारी मंत्री को जन औषधि केंद्र पर पर्याप्त दवाएं उपलब्ध न होने की जानकारी मिली। इस पर उन्होंने डीएम गौरांग राठी को जांच के निर्देश दिए। इसके बाद एडीएम प्रशासन शिव प्रताप शुक्ला और सीएमओ डॉ. शिशिर पुरी ने केंद्र की जांच की।

सीएमओ ने बताया कि जन औषधि केंद्र पर कम से कम 200 प्रकार की दवाओं की उपलब्धता जरूरी है, जबकि जांच के दौरान 179 प्रकार की दवाएं उपलब्ध मिलीं। कई जरूरी दवाओं की उपलब्धता न होने के कारण रोगियों के परिजनों को बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। केंद्र पर शिकायत के लिए संपर्क नंबर का डिस्प्ले भी नहीं मिला। सीएमओ ने बताया कि जांच की पूरी रिपोर्ट डीएम को आगे की कार्रवाई के लिए सौंपी जाएगी।

दवाएं तो दूर, सेनेटरी पैड तक की आपूर्ति नहीं

जन औषधि केंद्र के फार्मासिस्ट यश ने दावा किया कि करीब 60 प्रकार की दवाओं की आपूर्ति नहीं हुई है। इनके लिए काफी समय पहले ही ऑर्डर लगाया जा चुका है। उन्होंने बताया कि सेनेटरी पैड की आपूर्ति भी नहीं हो रही है। रोगियों की सुविधा के लिए शिकायत संबंधी फोन नंबर का डिस्प्ले जल्द कराया जाएगा।

500 बेड की बिल्डिंग के लिए जल्द मिलेंगे 47 करोड़ रुपये

औचक निरीक्षण के बाद प्रभारी मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि कुछ रोगियों ने आयुष्मान कार्ड के बावजूद बाहर से दवाएं मंगवाने की शिकायत की है। उन्होंने डीएम को मामले में जरूरी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज की 500 बेड की बिल्डिंग को चालू कराने के लिए करीब 47 करोड़ रुपये की जरूरत है। शासन स्तर से जल्द धनराशि अवमुक्त कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।



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