झांसी। किसानों के लिए खाद बीज मुहैया कराने समेत अन्य कार्यों के लिए सहकारिता विभाग ने एक साल के दौरान जनपद में 40 नई समितियां तो बनाईं, लेकिन इनका लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है। उर्वरक बेचने का लाइसेंस मिल जाने के बाद भी वे काम नहीं कर पा रही हैं। गोदामों के लिए जमीन न होने और कर्मचारियों के न होने के कारण काम नहीं हो पा रहा है।
वर्तमान में जनपद में 58 सहकारी समितियां संचालित हैं। इनका काम है सरकारी मूल्य पर किसानों के खाद और बीज उपलब्ध कराना। क्रेडिट के आधार पर उन्हें सुविधाएं दिलाना। अभी इन समितियों की आपस में दूरी ज्यादा है। किसानों को ज्यादा सुविधाएं देने के लिए पिछले एक साल के अंदर जनपद में 40 नई समितियों का गठन किया। फर्टिलाइजर का लाइसेंस भी मिल गया। अन्य औपचारिकताएं पूरी हो गईं, लेकिन न तो इन पर काम करने के लिए सचिव हैं, न ही लेखा से जुड़े कर्मचारी। यहां तक कि गोदामों के लिए जगह नहीं है। नतीजा है कि समितियों के पास खाद-बीज रखने के लिए जगह नहीं है।
केवल 28 सचिव हैं जनपद में
वर्तमान में जनपद में 48 समितियां संचालित हैं, जबकि सचिवों की संख्या केवल 28 है। कई सचिवों के पास अतिरिक्त प्रभार है। नई समितियों के लिए सचिवों की जरूरत है।
नई सहकारी समितियों के लिए गोदामों की जरूरत है। इसके लिए जमीन की मांग की गई है। जमीन मिलते ही गोदाम बनाए जाएंगे। सचिवों की भी कमी है।
कृष्णकुमार, सहायक आयुक्त व सहायक निबंधक, सहकारिता
