राम मंदिर के पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी सीईओ की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हो गई है। 5,300 से अधिक आवेदनों में से 18 उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया है। इस रेस में कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। चयन में केवल प्रशासनिक अनुभव ही नहीं, बल्कि नेतृत्व क्षमता, भीड़ प्रबंधन, धार्मिक-सामाजिक जुड़ाव और मंदिर की व्यवस्था को लेकर उम्मीदवार की सोच भी परखी जा रही है। सीईओ पद की रेस में तीन अधिकारी सबसे आगे चल रहे हैं, जिनमें पूर्व आईपीएस अफसर राजेश पांडेय, जौनपुर के पूर्व डीएम दिनेश चंद्र और अयोध्या के पूर्व डीएम योगेश्वर राम मिश्रा शामिल हैं। बाकी 15 नाम अभी सार्वजनिक नहीं हुए हैं।  


ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ये तीनों उम्मीदवार कौन हैं? इनके पास क्या अनुभव है? सीईओ पद के लिए इंटरव्यू कैसे लिया जा रहा है? किस तरह के प्रश्न पूछे जा रहे हैं? आखिरी फैसला किसका होगा? आइये जानते हैं…

पहले समझिए मामला क्या है?

राम मंदिर के लिए पूर्णकालिक सीईओ की नियुक्ति ऐसे समय हो रही है जब मंदिर में चढ़ावे में चोरी और गबन का मामला सामने आया। एसआईटी बनी, 25 जून को राम जन्मभूमि थाने में इस मामले में एफआईआर दर्ज हुई और आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे  हुए। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। जुलाई में सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी से स्टेटस रिपोर्ट मांगी और जांच को तेज, निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए। इसके बाद एसआईटी का पुनर्गठन किया गया और वित्तीय जांच के लिए विशेषज्ञों को शामिल करने की बात सामने आई। इसी पृष्ठभूमि में मंदिर के प्रशासन और वित्तीय व्यवस्था में अधिक जवाबदेही लाने के लिए पूर्णकालिक सीईओ की तलाश शुरू हुई है। 



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