खिलारा/भंडारा। अतिवृष्टि के कारण खेतों में जमा बरसाती पानी किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है। कई दिनों से पानी में डूबी खरीफ की फसलें सड़ने गलने लगी हैं। उड़द, मूंग, तिल और मूंगफली की फसलों को सबसे अधिक नुकसान हुआ है।
खेतों में जलभराव से पौधे पीले पड़कर गलने लगे हैं। कई खेत तालाब जैसे दिख रहे हैं, जिससे किसानों की महीनों की मेहनत और लागत बर्बाद हो रही है। खिलारा, बसरिया, पुरवा, धायपुरा, ढकरवारा, घाटकोटरा, भंडारा समेत आसपास के कई गांवों में निचले खेतों में पानी भरा है। किसानों के अनुसार, उड़द, मूंग और तिल की फसलों में शत प्रतिशत नुकसान हुआ है। मूंगफली की फसल भी लगातार पानी में डूबे रहने से प्रभावित हुई है। किसान भगवतप्रसाद विश्वकर्मा और हरिश्चंद्र पटेल ने हजारों रुपये की लागत बर्बाद होने की बात कही। हनुमत सिंह सोलंकी और प्रेमनारायण तिवारी ने कहा कि जलभराव से फसल बचाना मुश्किल हो गया है।
प्रभावित किसानों ने प्रशासन से तत्काल सर्वे कराने की मांग की है। उन्होंने राजस्व, कृषि विभाग और बीमा कंपनी की संयुक्त टीमें भेजने को कहा। किसानों ने फसल बीमा योजना के तहत क्षतिपूर्ति और प्राकृतिक आपदा में आर्थिक सहायता मांगी है। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर शीघ्र राहत उपलब्ध कराने की अपील की गई है।
