झांसी। करीब 30 साल पहले ऑटो पलटने से 12 वर्षीय बालिका की मौत के मामले में आखिरकार फैसला आ गया। मऊरानीपुर की न्यायिक मजिस्ट्रेट गरिमा सक्सेना ने सोमवार को ऑटो चालक राजू को दोषी ठहराते हुए दो वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। न्यायालय ने उस पर 3,500 रुपये का जुर्माना भी लगाया। मुकदमा दर्ज होने के समय करीब 30 वर्ष का राजू अब करीब 60 वर्ष का हो चुका है।

अभियोजन के मुताबिक, 14 जनवरी 1996 को उल्दन थाने में मृतका के पिता कालीचरण की तहरीर पर मामला दर्ज किया गया था। आरोप था कि राजू ऑटो को तेज गति और लापरवाही से चला रहा था। इसी दौरान ऑटो पलट गया और उसमें सवार 12 वर्षीय बालिका की मौत हो गई। पुलिस ने मामले में गैर इरादतन हत्या की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।

छह सवारियां लेकर जा रहा था ऑटो

मामला दर्ज होने के समय राजू करीब 30 वर्ष का था। वह छह सवारियों को ऑटो में बैठाकर बंगरा-उल्दन मार्ग पर जा रहा था। इसी दौरान ऑटो अनियंत्रित होकर पलट गया। हादसे में बालिका की मौत हो गई। घटना के बाद चालक के खिलाफ गैर इरादतन हत्या की धाराओं में कार्रवाई की गई।

गवाहों के नहीं पहुंचने से लंबी खिंची सुनवाई

मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कई बार गवाहों को तलब किया, लेकिन उनके समय पर उपस्थित नहीं होने के कारण कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी। इसी वजह से मुकदमे के निस्तारण में लंबा समय लगा। अभियोजन की ओर से पेश दलीलों और साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने राजू को दोषी माना और दो वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। एपीओ रवि प्रकाश जायसवाल ने बताया कि गवाहों के समय पर उपस्थित नहीं होने के कारण मामले के निस्तारण में काफी समय लगा।



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