झांसी। डिजिटल भुगतान बुंदेलों को भी खूब लुभा रहा है। हालिया बैंकिंग आंकड़े बताते हैं कि अप्रैल से अगस्त माह के बीच झांसी में यूपीआई से करीब 920 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ। रोजाना औसतन करीब 5.71 करोड़ रुपये यूपीआई से एक से दूसरे बटुए में भेजे गए। बैंक अफसरों का कहना है औसतन डेढ़ गुना की दर से इसमें इजाफा हो रहा है। आने वाले समय में यह संख्या बढ़ने की उम्मीद है। वहीं, यूपीआई से लेनदेन बढ़ने से एटीएम तेजी से उपयोगिता खो रहे हैं।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) के जरिये वित्त वर्ष 2022-23 में 14.96 लाख ट्रांजेक्शन की मदद से 1424.50 करोड़ का लेनदेन हुआ वहीं, इस वित्तीय वर्ष (2026-2027) में अगस्त महीने तक 9,66,000 ट्रांजेक्शन की मदद से करीब 920 करोड़ रुपये का लेनदेन हो चुका। अनुमान लगाया जा रहा कि वित्तीय वर्ष के खत्म होने तक यह आंकड़ा 2200 करोड़ रुपये तक जा पहुंचेगा।
बड़े त्योहारी सीजन में इजाफा होने की उम्मीद है। इस तरह तीन साल में डेढ़ गुना की रफ्तार से यूपीआई का इस्तेमाल बढ़ रहा है। बैंक अधिकारियों का कहना है कि एंड्रायड फोन के इस्तेमाल बढ़ने से यूपीआई भी तेजी से बढ़ रहा है। इससे बैंकों को भी आसानी हो रही है। अभी तक उनको नकदी संभालने के लिए मशक्कत करनी पड़ती थी। बड़ी संख्या में रोजाना ग्राहक भी पहुंचते थे। अब नकदी लेने के लिए लोग बैंक नहीं पहुंच रहे। एलडीएम योगेश ठाकुर का कहना है कि यूपीआई इस्तेमाल बढ़ने से बैंकों को भी सहूलियत होने के साथ ही नकदी की परेशानी भी दूर हुई है।
अब रोजाना नहीं भरे जाते एटीएम
यूपीआई के जरिये लेनदेन बढ़ने से एटीएम का इस्तेमाल भी घट गया। पंजाब नेशनल बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, यूनियन बैंक, सेंट्रल बैंक, केनरा बैंक समेत कई राष्ट्रीयकृत बैंकों के एटीएम बूथों में रोजाना नकदी भरी जाती थी लेकिन, अब रोजाना नकदी नहीं डाली जाती। सदर बाजार, इलाइट, सीपरी बाजार जैसे इलाकों में बने एटीएम में दो बार तक नकदी डाली जाती थी लेकिन, अब इन बूथों का हाल यह है कि कई-कई दिन तक यहां नकदी डालने की जरूरत ही नहीं पड़ती। बैंक अफसरों का भी कहना है कि यूपीआई लेनदेन बढ़ने की वजह से अब नए एटीएम बूथ नहीं खोले जा रहे हैं। झांसी में सबसे अधिक 75 एटीएम एसबीआई बैंक के हैं जबकि 49 एटीएम पीएनबी के हैं। जनपद में कुल 228 एटीएम अभी संचालित हो रहे हैं।
डिजिटल नकदी के फायदे
नकदी भुगतान तेज एवं आसान
लेनदेन का डिजिटल रिकॉर्ड रखने में आसानी
ग्रामीण इलाकों में बैंकिंग सुविधाएं बढ़ी
पैसा भेजने में समय एवं खर्च की बचत
यह नुकसान भी
डिजिटल पेमेंट की सुविधा के बाद से साइबर ठगी के मामले बढ़ गए
इंटरनेट एवं सर्वर की मुश्किल की वजह से भुगतान नहीं हो पाता
डिजिटल पेमेंट की गोपनीयता एवं डेटा सुरक्षा का खतरा बढ़ा
