ललितपुर। जिले में एंटी करप्शन टीम की कार्रवाई के बावजूद रिश्वतखोरी के मामले सामने आ रहे हैं। पिछले 15 दिनों में दो लेखपालों को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। दोनों मामलों में राजस्व संबंधी काम कराने के नाम पर रकम मांगने की शिकायत की गई थी। कार्रवाई के बाद आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर उन्हें भ्रष्टाचार निवारण न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।

सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार की शिकायतों पर एंटी करप्शन और विजिलेंस टीमें कार्रवाई कर रही हैं। जिले में हाल में हुई दो कार्रवाइयों में राजस्व विभाग के लेखपाल पकड़े गए हैं। इन घटनाओं ने राजस्व संबंधी कामकाज में पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

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विरासत दर्ज कराने के नाम पर मांगी थी रिश्वत

पहली कार्रवाई 23 सितंबर को महरौनी तहसील के बाहर हुई थी। भ्रष्टाचार निवारण संगठन झांसी की ट्रैप टीम ने लेखपाल बालमुकुंद राजपूत को चार हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा था। महरौनी तहसील के सड़कौरा गांव निवासी अमर सिंह ने अपने मृत भाई की कृषि भूमि का विरासत नामांतरण दर्ज कराने के नाम पर रिश्वत मांगे जाने की शिकायत की थी। शिकायत के आधार पर टीम ने कार्रवाई की। ट्रैप टीम प्रभारी की तहरीर पर आरोपी लेखपाल के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप में रिपोर्ट दर्ज की गई। बाद में उसे भ्रष्टाचार निवारण न्यायालय, झांसी में पेश किया गया, जहां से जेल भेज दिया गया।

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जमीन की हदबंदी संबंधी कार्रवाई के लिए लिए 15 हजार

दूसरी कार्रवाई आठ अक्तूबर को हुई। सदर तहसील में तैनात लेखपाल विपुल तिवारी को एंटी करप्शन टीम ने उसके घर से 15 हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। ग्राम टोरिया निवासी किसान मनोज राजपूत ने हदबंदीशुदा जमीन से संबंधित धारा 30/2 की कार्रवाई कराने के नाम पर रिश्वत मांगे जाने की शिकायत की थी। इसके बाद टीम ने कार्रवाई करते हुए लेखपाल को पकड़ लिया। एंटी करप्शन झांसी की ट्रैप टीम के प्रभारी शादाब खान की तहरीर पर कोतवाली सदर में आरोपी लेखपाल के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप में रिपोर्ट दर्ज की गई। शुक्रवार को पुलिस उसे लेकर झांसी रवाना हुई और भ्रष्टाचार निवारण न्यायालय में पेश किया। वहां से उसे जेल भेज दिया गया। सीओ सदर अजय कुमार ने बताया कि आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर आगे की कार्रवाई की गई है।

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निगरानी व्यवस्था पर उठ रहे सवाल

15 दिनों के भीतर दो लेखपालों के रिश्वत लेने के आरोप में पकड़े जाने से राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। भूमि के नामांतरण और हदबंदी जैसे काम आम लोगों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे मामलों में रिश्वत की शिकायतें सामने आना विभागीय पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत को रेखांकित करता है।



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