झांसी। बीडा के लिए जमीन लेने की प्रक्रिया में आरक्षित वन भूमि के राजस्व अभिलेख में नाम बदलने का मामला सामने आया है। बाजना आरक्षित वन की 125.30 एकड़ जमीन राजस्व अभिलेखों में बीडा के नाम दर्ज कर दी गई है। खास बात यह है कि इसमें वन विभाग अनुमति और केंद्र सरकार, दोनों में से किसी की भी मंजूरी नहीं ली गई है। अब प्रभागीय वनाधिकारी ने यह भूमि फिर से वन विभाग के नाम दर्ज करने के लिए डीएम को पत्र भेजा है।
झांसी के 33 गांवों में 62,599 एकड़ क्षेत्रफल में बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) विकसित किया जा रहा है। इसके लिए जमीन की खरीद का काम भी तेजी से चल रहा है। इसी बीच, वन ब्लॉक-1 में 110.57 एकड़ और वन ब्लॉक-2 में 14.73 एकड़ आरक्षित वनभूमि बीडा के नाम दर्ज हो जाने का मामला सामने आया है। इस पर प्रभागीय वनाधिकारी ने डीएम को भेजे पत्र में कहा कि यह भूमि वन विभाग के अधिकार और नियंत्रण में है। यह भूमि फसली वर्ष 1422-1427 की खतौनी में भी जंगल सरकारी के नाम से दर्ज थी, जो वर्तमान फसली वर्ष 1428-1433 की खतौनी में बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण के नाम दर्ज हो चुकी है।
पत्र में कहा गया है कि राजस्व अभिलेखों में त्रुटिवश यह आरक्षित वन भूमि को बिना वन विभाग की अनुमति और केंद्र सरकार की स्वीकृति के बीडा के नाम दर्ज कर दिया गया। उल्लेखनीय है कि वन सरंक्षण अधिनियम 1980 के प्रावधानों के अनुसार भारत सरकार की स्वीकृति के बिना किसी भी आरक्षित वन भूमि का अभिलेखीय परिवर्तन अथवा गैर-वानिकी प्रयोजन के लिए हस्तांतरण विधिसम्मत नहीं है।
पूर्ण आरक्षित वन के नाम से दर्ज भूमि के भी परीक्षण की मांग
बाजना में 21 फरवरी, 1879 में अधिसूचित और राजस्व मानचित्र में भी डांग सरकारी (पूर्ण आरक्षित वन) के नाम से दर्ज है। इसका क्षेत्रफल 218.10 हेक्टयेर है। प्रभागीय वनाधिकारी ने इस भूमि के राजस्व अभिलेखों का परीक्षण कराने की भी मांग की है। कहा कि यदि कहीं त्रुटिपूर्ण प्रविष्टि मिलती है तो तत्काल संशोधन कराया जाए।
केंद्र सरकार की अनुमति से ही आरक्षित वन भूमि हस्तांतरित की जा सकती है। बाजना की सवा सौ एकड़ भूमि के लिए न तो केंद्र सरकार की अनुमति ली गई न ही वन विभाग की एनओसी। अब अभिलेख दुरुस्तीकरण के लिए जिलाधिकारी को पत्र लिखा गया है।
– विकास यादव, प्रभागीय वनाधिकारी, झांसी वन विभाग।
