अमृत योजना में करीब 600 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। इसके बावजूद महानगर के करीब 20 हजार आबादी तक इस दफा भी पानी नहीं पहुंच सका। इन इलाकों के लिए टैंकरों का ही सहारा है।



घर तक साफ पानी पहुंचाने के लिए अमृत (झांसी पेयजल पुनर्गठन योजना) के जरिये 600.42 करोड़ रुपये से 21 जून 2019 को काम शुरू हुआ था। इसे 20 जून 2022 तक पूरा हो जाना चाहिए था लेकिन, लेटलतीफी के चलते यह काम अब तक अधूरा है। इस वजह से बड़ागांव गेट, सराय मोहल्ला, दरीगरान, भांडेरी गेट, सिजरिया कॉलोनी, अलीगोल, कसाई मंडी, ओरछा गेट, आईटीआई कैंपस के पास, प्रेमनगर, पुरानी पुलिस चौकी, ताज कंपाउंड, मद्रासी कॉलोनी, सत्यम कॉलोनी, अन्नपूर्णा कॉलोनी, चार खंभा, बाहर उन्नाव गेट, ऋषिकुंज स्कूल के पास, मास्टर कॉलोनी सहित अन्य कई मोहल्लों में पानी आना शुरू नहीं हुआ। यहां करीब बीस हजार की आबादी है। इन इलाकों में जल संस्थान को टैंकर भेजने पड़ रहे हैं। यहां के लोग सुबह से ही पानी के लिए डिब्बे लेकर भटकते हैं। लोगों को साइकिल, ठेला और गाड़ियों से पानी ढोना पड़ता है। जबकि महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे पैदल ही पानी भरकर लाने को मजबूर हैं। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता उमेश प्रसाद का कहना है कि जिन इलाकों में पानी नहीं आ रहा, वहां टैंकर भेजे जा रहे हैं।



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