आलू आढ़ती देवेश शुक्ला के मामले में लापरवाही बरतने वाले इंडस्ट्रियल चौकी प्रभारी विकास वर्मा और दरोगा शरद कुमार को निलंबित कर दिया गया है। डीसीपी वेस्ट ने प्रारंभिक जांच में दोनों की लापरवाही को उनकी गुमनाम मौत का जिम्मेदार माना है। इनमें चौकी प्रभारी के पास उनके घायल मिलने की सूचना आई थी। इसे उन्होंने किसी गंभीरता से न लेते हुए उच्चाधिकारियों को बताना उचित नहीं समझा। वहीं मौत की सूचना पर पोस्टमार्टम के लिए पंचनामा भरने वाले दरोगा शरद कुमार को शिनाख्त के प्रयास न करने का आरोपी माना गया है। वहीं लापरवाही बरतने पर सचेंडी और पनकी थानेदार की विभागीय जांच होगी।
जूही निवासी मनोज कुमार शुक्ला की चकरपुर मंडी में देवेश कुमार योगेश कुमार एंड संस के नाम से आढ़त है। उनके भाई देवेश शुक्ला दो जुलाई को मंडी गए थे, तब से वापस नहीं लौटे। मनोज ने सचेंडी थाने में पांच जुलाई को मंडी व्यापारी संजू पाल, उसके मुनीम टिंकू यादव और ऑटो चालक प्रांशु के खिलाफ अपहरण आदि धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने संजू पाल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। शनिवार को मामले की सुनवाई में कचहरी से लौटते समय उनके भाई फील्ड यूनिट कार्यालय गए थे। जहां उन्हें उनके लापता भाई देवेश शुक्ला की सात जुलाई को मौत और 10 को पोस्टमार्टम व अंतिम संस्कार होने की जानकारी मिली।
