कानपुर नगर निगम की लापरवाही से भीषण गर्मी में किदवईनगर ग्रीनबेल्ट में पेड़-पौधे सूखने लगे हैं। कई जगह रेलिंग टूटने से इसमें छुट्टा मवेशी घुसने लगे हैं। नर्सिंगहोम, रेस्टोरेंट, दुकानदारों ने पांच से ज्यादा स्थानों पर ग्रीनबेल्ट उजाड़कर आने-जाने का रास्ता और पार्किंग बना ली है। खास बात यह है कि देखरेख करने वाले ठेकेदार को अनुबंध छह माह पहले खत्म हो गया था। हालांकि, अभी तक नगर निगम ने न तो ठेका दिया और न ही माली की व्यवस्था की।
नगर निगम ने ढाई साल पहले ढाई करोड़ की लागत से किदवईनगर ग्रीनबेल्ट (बाबाकुटी चौराहे से यशोदानगर तक) विकसित की थी। ब्लाॅकवार बनाई गई इस साढ़े तीन किलोमीटर लंबी ग्रीनबेल्ट में सिंचाई के लिए सबमर्सिबलों की बोरिंग भी कराई गई थी। इसमें पौधे लगाने वाले ठेकेदार की दो साल तक रखरखाव की भी जिम्मेदारी थी। साढ़े तीन किमी लंबी इस ग्रीनबेल्ट में मियावाकी पद्धति से पौधे लगाए गए थे जो नियमित रूप से सिंचाई और रखरखाव होने से मिनी जंगल का रूप लेने लगा था।
